41 स्टैंडिंग कमेटियों में से 31 की अध्यक्षता भाजपा को मिली; बागी विधायक कन्हाई लाल अग्रवाल बने PAC अध्यक्ष
कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा की स्थायी समितियों (Standing Committees) के गठन को लेकर नया सियासी संग्राम छिड़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) ने भारतीय जनता पार्टी और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट पर आपस में मिलीभगत कर महत्वपूर्ण कमेटियों का बंटवारा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी 41 स्टैंडिंग कमेटियों की सूची के अनुसार, 31 कमेटियों की अध्यक्षता भाजपा विधायकों को सौंपी गई है, जबकि विपक्ष के खाते में आई 10 कमेटियों में से 9 पर बागी गुट का कब्जा रहा है।
कमेटियों के गठन से जुड़ी 5 प्रमुख बातें
- 41 कमेटियों के अध्यक्ष घोषित: विधानसभा की कुल 41 स्टैंडिंग कमेटियों के अध्यक्षों के नामों का ऐलान हुआ।
- भाजपा का दबदबा: 31 कमेटियों की कमान सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों को दी गई।
- PAC का अध्यक्ष पद: बागी टीएमसी विधायक कन्हाई लाल अग्रवाल को सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘पब्लिक अकाउंट्स कमेटी’ (PAC) का अध्यक्ष बनाया गया।
- ISF को जिम्मेदारी: इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी को ‘पेपर लेड कमेटी’ का अध्यक्ष बनाया गया, जिसका ममता गुट ने स्वागत किया है।
- बागी गुट को 9 कमेटियां: विपक्ष के हिस्से आई 10 कमेटियों में से 9 की अध्यक्षता ऋतव्रत बनर्जी गुट को मिली।
‘वरिष्ठों को नजरअंदाज किया गया’—कुणाल घोष का आरोप
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कमेटियों के आवंटन में वरिष्ठता और योग्यता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है:
- वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी को केवल ‘लाइब्रेरी कमेटी’ दी गई, जबकि 10 बार के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को किसी भी कमेटी का अध्यक्ष नहीं बनाया गया।
- योग्यता की अनदेखी: आईटी बैकग्राउंड वाली विधायक अलिफा अहमद को आईटी कमेटी के बजाय ‘सेल्फ हेल्प ग्रुप कमेटी’ में भेज दिया गया।
- गृह समिति पर सवाल: गृह मामलों की समिति में निष्पक्ष समीक्षा रोकने के लिए सरकार समर्थित सदस्यों को रखने का आरोप लगाया गया।
भाजपा और बागी गुट का जवाब
| पक्ष | रुख / वक्तव्य |
| ऋतव्रत बनर्जी (नेता प्रतिपक्ष) | आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कमेटियों का बंटवारा सदन में संख्याबल के आधार पर हुआ है। पीएसी (PAC) अध्यक्ष का पद विपक्ष को देकर पुरानी संसदीय परंपरा को बहाल किया गया है। |
| भाजपा विधायक दल | नियमों के तहत ही गठन हुआ है। सरकार का विपक्ष की ओर से नाम तय करने में कोई हस्तक्षेप नहीं रहता। |
दो फाड़ में बंटी टीएमसी का पृष्ठभूमि
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ा विभाजन देखने को मिला था। पहले 80 में से 65 विधायकों ने ऋतव्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था, जिसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। इसके बाद 20 लोकसभा सांसद भी एनडीए समर्थित एनसीपीआई (NCPI) के साथ चले गए थे, जिनकी सदस्यता पर दलबदल कानून के तहत फैसला फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है।

