बीएनपी नेता को मिले 255 वोट, शेख हसीना के विरोध में निभाई थी अहम भूमिका; बढ़ेगी पद की शक्ति
ढाका: बांग्लादेश की संसद ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर को देश का 23वां राष्ट्रपति निर्वाचित कर लिया है। देश में लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न हुआ। सत्तारूढ़ बीएनपी की ओर से उम्मीदवार बनाए गए आलमगीर ने 255 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
मिर्ज़ा फ़ख़रुल पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रमुख राजनीतिक विरोधियों में गिने जाते हैं। 2024 में हुए बड़े छात्र आंदोलन के बाद शेख़ हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी और वह भारत में शरण लिए हुए हैं, जिनके प्रत्यर्पण की मांग बांग्लादेश की मौजूदा सरकार कर रही है।
कठिन दौर में संभाली पार्टी की कमान आलमगीर ने राजनीतिक उथल-पुथल और संकट के समय बीएनपी का कुशलता से नेतृत्व किया और इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उनके इस संघर्ष और पार्टी में लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें सर्वोच्च संवैधानिक पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
राष्ट्रपति पद को अधिक शक्तियां देने की तैयारी बांग्लादेश की शासन व्यवस्था में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से औपचारिक और संवैधानिक प्रमुख का होता है। हालांकि, देश में प्रस्तावित नए संवैधानिक सुधारों के तहत राष्ट्रपति पद को और अधिक कार्यकारी शक्तियां दिए जाने की योजना है, जिससे देश के शीर्ष नेतृत्व के बीच सत्ता का उचित संतुलन स्थापित किया जा सके।

