राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शनों की तैयारी, 24 सितंबर की बरसी पर सुरक्षा तंत्र मुस्तैद
लेह/नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पूर्ण राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आगामी सितंबर का महीना केंद्रीय गृह मंत्रालय और स्थानीय लद्दाख प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील और चुनौतियों से भरा रहने वाला है। पिछले वर्ष 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों—जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे—की पहली बरसी पर क्षेत्र में कई शांति मार्च, जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित हैं।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे माह लद्दाख पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और स्थानीय सुरक्षा तंत्र की विशेष नजर रहेगी।
सोशल मीडिया और ‘जेन जी’ पर रहेगी खुफिया निगरानी
सुरक्षा रणनीतिकारों के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती के केंद्र में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और युवा पीढ़ी (‘जेन जी’) हैं। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाले संदेशों और आह्वानों पर लगातार पैनी नजर रख रही हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाले प्रयासों को समय रहते रोका जा सके।
सीआरपीएफ और आरएएफ की 12 कंपनियां तैनात
संभावित तनाव और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और इसकी विशेष दंगा-रोधी इकाई त्वरित कार्य बल (RAF) की 12 कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दे दी है। यह केंद्रीय बल 31 अगस्त से 30 सितंबर तक पूरे केंद्र शासित प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेगा।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लद्दाख प्रशासन के गृह विभाग के विशेष सचिव ने अगस्त के दूसरे सप्ताह में कानून-व्यवस्था की सुचारू स्थिति बनाए रखने के लिए औपचारिक रूप से अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग भेजी थी, जिसके आधार पर यह तैनाती सुनिश्चित की गई है।

