मुख्यालय से मतदाता सूची में फेरबदल संभव नहीं, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा केंद्रीकरण पर जताई गई थी चिंता
नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग के आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ईसीआईनेट’ (ECINet) और मतदाता सूची डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि ईसीआईनेट पूरी तरह से एक विकेंद्रीकृत (डीसेंट्रलाइज्ड) डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके तहत मतदाता सूची तैयार करने, नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने जैसे तमाम वैधानिक और कानूनी अधिकार केवल जमीनी स्तर पर तैनात संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के पास ही सुरक्षित हैं। आयोग के नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय में बैठा कोई भी अधिकारी या तकनीकी कर्मी इन स्थानीय अधिकारियों के स्थान पर कोई फेरबदल नहीं कर सकता।
यह विस्तृत प्रशासनिक सफाई ऐसे नाजुक समय में सामने आई है जब आयोग की समग्र डिजिटल कार्यप्रणाली, सर्वर सुरक्षा और मतदाताओं के संवेदनशील डेटा तक केंद्रीय पहुंच को लेकर नीतिगत सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालिया मीडिया खुलासों में यह बात सामने आई थी कि निर्वाचन आयोग के दो शीर्ष चुनाव आयुक्तों, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मतदाता सूची डेटाबेस के कथित ‘धीरे-धीरे केंद्रीकरण’ की कार्यशैली पर आंतरिक रूप से गंभीर चिंता व्यक्त की थी और इस बाबत औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
आयोग के अधिकारियों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और क्षेत्रीय स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए डिजिटल ढांचे को त्रिस्तरीय सुरक्षा और स्थानीय सत्यापन प्रणाली से बांधा गया है। अधिकारियों ने दोहराया कि फील्ड स्तर पर तैनात निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) ही मतदाता डेटा को अद्यतन करने के लिए कानूनन सक्षम प्राधिकारी हैं। मुख्यालय स्तर पर केवल तकनीकी निगरानी और समन्वय का कार्य होता है, जिससे किसी भी प्रकार के केंद्रीय हस्तक्षेप या डेटा में अनधिकृत बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।

