दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकेंगे नए आंसू गैस गोले, सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध से किया था इनकार
नई दिल्ली: देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षा रणनीतियों में अहम बदलाव किए जा रहे हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा अब अत्यधिक घातक साबित होने वाली पैलेट गन का इस्तेमाल केवल अत्यंत विषम परिस्थितियों में आखिरी उपाय (लास्ट रिजॉर्ट) के रूप में ही किया जाएगा। इसके विकल्प के तौर पर सुरक्षा बलों को आधुनिक मल्टी पैलेट गन से दागे जाने वाले विशेष आंसू गैस ग्रेनेड से लैस किया जा रहा है, जिन्हें उग्र भीड़ द्वारा आसानी से निष्क्रिय नहीं किया जा सकेगा।
अक्सर देखा गया है कि हिंसक प्रदर्शनों के दौरान जब सुरक्षा बल भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सामान्य आंसू गैस के गोले छोड़ते हैं, तो प्रदर्शनकारी उन्हें उठाकर वापस पुलिस और जवानों की ओर फेंक देते हैं। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए अब ऐसे उन्नत तकनीक वाले ग्रेनेड तैयार किए गए हैं जो जमीन पर गिरते ही तेजी से धुआं छोड़ते हैं और उन्हें दोबारा उठाकर फेंकना या इस्तेमाल में लाना असंभव होगा। इस आधुनिक तकनीक से सुरक्षा बलों को बिना जानलेवा हथियारों के भीड़ को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर देश की शीर्ष अदालत में भी लंबी कानूनी बहस चल चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित ‘सीजेपी’ के प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा को नियंत्रित करने के लिए जब सुरक्षा बलों ने पैलेट गन का सहारा लिया था, तब कई युवकों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद जमकर राजनीतिक विवाद हुआ था। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए थे और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा चुनौतियों और जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया था।

