ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधी, नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों को गच्चा देने के लिए साइबर ठगों ने जेनिफर, एलन, टॉम और टॉम-सपोर्ट, नामों से टेलीग्राम समूह बनाए। इसके जरिए संगठित आपराधिक सिंडिकेट (ओसीएस) स्थापित किए गए। ओसीएस की मदद से लोगों को निशाना बनाया गया। उन्हें धोखा देकर उनके पैसे हड़पने की आपराधिक साजिश रची। ओसीएस के संचालकों ने कमीशन के बदले म्यूल अकाउंट यानी खच्चर खाते खोले। इसके बाद दुबई से इन खातों में जमा राशि को क्रिप्टो में बदला गया। टेलीग्राम समूहों में ओसीएस के सदस्यों द्वारा साझा किए गए निजी क्रिप्टो वॉलेट में उक्त राशि को वापस ट्रांसफर कर देते हैं। विभिन्न साइबर अपराधों के जरिए 303 करोड़ रुपये इधर उधर किए गए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 मार्च को, विभिन्न साइबर अपराधों जैसे निवेश धोखाधड़ी, अवैध सट्टेबाजी, अंशकालिक नौकरी धोखाधड़ी आदि के माध्यम से उत्पन्न आय को सफेद करने के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत एल्डर राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज की है। ठगी का यह खेल, यूएई आधारित फिनटेक कंपनी पीवाईवाईपीएल की मदद से खेला गया है। तलाशी के बाद की जांच के दौरान, ईडी ने दो चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए अजय, सीए विपिन यादव, दो क्रिप्टो ट्रेडर्स जितेंद्र कस्वां और अल्लादी राजासाई को गिरफ्तार किया था। ये लोग मुख्य तौर पर दुबई से अपने काम को अंजाम देते हैं। इस मामले में जोधपुर राजस्थान से चार अन्य आरोपी राकेश करवा, छोटू सिंह गुर्जर, मोहित सिंह और कुलदीप सिंह भी शामिल हैं।
ईडी ने 1.36 करोड़ रुपये का निजी क्रिप्टो वॉलेट कुर्क किया है। धारा 5 पीएमएलए के तहत 7.00 करोड़ रुपये की संपत्तियां अनंतिम रूप से कुर्क की गईं और 47 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई है। जांच के दौरान ईडी को साइबर धोखाधड़ी के विभिन्न तौर-तरीकों का पता चला है। साइबर अपराध की वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों द्वारा जेनिफर, एलन, टॉम, टॉम-सपोर्ट आदि के नाम से कई टेलीग्राम समूह बनाए गए थे। इनके माध्यम से काम करने वाले सदस्यों के साथ एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट (ओसीएस) ने भारतीय जनता को धोखा देने और धोखाधड़ी से उनके पैसे हड़पने के लिए आपराधिक साजिश रची।
ओसीएस के संचालकों ने कमीशन के बदले हजारों म्यूल अकाउंट यानी खच्चर बैंक खातों की व्यवस्था एवं संचालन के लिए कई व्यक्तियों को काम पर रखा। जांच के दौरान पता चला है कि एक बार जब धोखाधड़ी का पैसा इन खातों में जमा हो जाता है, तो आरोपी विभिन्न अन्य खच्चर खातों के माध्यम से आय को लूट लेते हैं। इसे पीवाईवाईपीएल प्लेटफॉर्म पर या दुबई में नकदी के माध्यम से क्रिप्टो में बदला जाता है। टेलीग्राम समूहों में ओसीएस के सदस्यों द्वारा साझा किए गए निजी क्रिप्टो वॉलेट में ठगी की राशि, वापस ट्रांसफर कर दी जाती है।
आरोपियों पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लूट के लिए जिम्मेदार एक घोटाले की साजिश रचने का आरोप है। 303 करोड़ की आय (जैसा कि अब तक पहचाना गया है) विभिन्न साइबर अपराधों से जुड़ी है। यह जांच, वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से की गई थी। ईडी ने लैपटॉप, आईपैड, स्मार्टफोन, निजी क्रिप्टो वॉलेट, कई बैंक खाते, चेक बुक, एटीएम कार्ड आदि सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। सबूतों के लिए इनका विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है। कई संदिग्ध आरोपी फरार हैं।

