बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान से किए गए अपने वादे के मुताबिक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही पिछले कुछ समय से राज्य में चल रही राजनीतिक अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बाद सिद्धारमैया सहजता से पद छोड़ देंगे, और हुआ भी वैसा ही।
राज्यपाल के सचिव को सौंपा इस्तीफा
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार, सिद्धारमैया ने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत के विशेष सचिव प्रभु शंकर को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया है। दरअसल, राज्यपाल गहलोत इस समय राज्य से बाहर हैं और उनके आज देर रात तक बेंगलुरु लौटने की उम्मीद है।
अपने इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा करते हुए भावुक सिद्धारमैया ने कहा, “मैंने आज मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे कर्नाटक की सेवा करने का यह ऐतिहासिक अवसर दिया।”
सिद्धारमैया का लंबा और सफल कार्यकाल
सिद्धारमैया कर्नाटक के उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हैं जिनका प्रशासनिक कार्यकाल बेहद मजबूत रहा है। उन्होंने साल 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री के रूप में अपना पहला पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। वहीं, हाल ही में 20 मई को उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री अपने दूसरे कार्यकाल के भी तीन वर्ष सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
कैबिनेट की बैठक में भावुक हुए डीके शिवकुमार
सिद्धारमैया के इस्तीफे से पहले गुरुवार को उनके आवास पर कैबिनेट सहयोगियों के साथ ‘नाश्ते पर बैठक’ बुलाई गई थी, जो बेहद भावुक माहौल में बदल गई। कर्नाटक में सत्ता का यह हस्तांतरण (Power Shift) बेहद सहज और शांतिपूर्ण तरीके से होता दिख रहा है।
इस बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बेहद भावुक हो गए। उन्होंने भरे मन से सिद्धारमैया को गले लगाया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। बैठक में शामिल रहे एक कैबिनेट मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूरी कैबिनेट ने सिद्धारमैया के नेतृत्व की सराहना की और डीके शिवकुमार ने बड़े भाई की तरह उनका आशीर्वाद लेकर नए सफर की शुरुआत की है। अब सबकी नजरें कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के आधिकारिक नाम के ऐलान पर टिकी हैं।

