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Tuesday, June 23, 2026

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खरीफ सीजन में किसानों के लिए बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत आ रहे 4 खाद से लदे जहाज; पिछले साल से 16% अधिक है उर्वरक भंडार

नई दिल्ली: देश में खरीफ फसलों की बुवाई के पीक सीजन के बीच भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। भारत सरकार द्वारा सोमवार (22 जून 2026) को जारी एक आधिकारिक विधिक व रणनीतिक बयान के अनुसार, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर जैसी जरूरी खादों की विशाल खेप लेकर आ रहे चार बड़े मालवाहक जहाज (Cargo Ships) पिछले सप्ताह दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं।

ये चारों पोत अब बिना किसी बाधा के भारत के विभिन्न तटों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो जल्द ही देश के चार प्रमुख बंदरगाहों— कृष्णापटनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा पर लंगर डालेंगे। सरकार ने निर्देश दिया है कि बंदरगाहों पर पहुंचते ही खाद को प्राथमिकता के आधार पर उतारा (Unload) जाएगा ताकि देश के ग्रामीण इलाकों और सहकारी समितियों तक इसकी समय पर आपूर्ति (Supply Chain) सुनिश्चित की जा सके।

देश में उर्वरकों का बंपर स्टॉक: पिछले वर्ष की तुलना में भारी बढ़त

कृषि मंत्रालय और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के विधिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष में देश का उर्वरक रिजर्व पिछले साल के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है:

  • कुल संचयी भंडार (22 जून 2026 तक): 196.08 लाख टन
  • पिछले वर्ष का भंडार (समान अवधि): 168.67 लाख टन (इस बार लगभग 27.41 लाख टन अधिक भंडार)

खरीफ सीजन में मांग और घरेलू उत्पादन का गणित

  • बिक्री में उछाल: मानसून के आगे बढ़ने के साथ ही 1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच देश में कुल 153.4 लाख टन खाद की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है, जो पिछले साल की समान अवधि (140.2 लाख टन) से 13.2 लाख टन अधिक है।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और मूल्य वृद्धि से भारतीय किसानों को बचाने के लिए सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर 133.12 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही आपूर्ति में संतुलन बनाए रखने के लिए बंदरगाहों पर 43.69 लाख मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित आयात भी किया गया है।

विदेशी टेंडर और 28 भारतीय मिशनों की सफल ‘उर्वरक कूटनीति’

वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में लाल सागर (Red Sea) संकट के कारण आ रही रुकावटों को बेअसर करने में भारत की ‘फर्टिलाइजर डिप्लोमेसी’ बेहद कारगर साबित हुई है। विदेशों में मौजूद 28 भारतीय दूतावासों (Indian Missions) ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए आयात के वैकल्पिक मार्ग और नए विधिक अनुबंध (Contracts) सुनिश्चित किए हैं:

  1. नया वैश्विक टेंडर: सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय निविदा के माध्यम से 17.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त खरीद का विधिक सौदा किया है। इसके साथ ही सरकार चालू खरीफ सीजन के लिए 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और पीएंडके (P&K) उर्वरकों का अग्रिम प्रबंध कर चुकी है।
  2. यूरिया आपूर्ति करने वाले मुख्य राष्ट्र: ओमान, रूस, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड।
  3. DAP और NPK के रणनीतिक साझीदार: रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब। इन देशों से आपूर्ति मुख्य रूप से सुरक्षित रेड सी शिपिंग लेन के माध्यम से की जा रही है।

सरकार ने देश के किसान समुदाय को आश्वस्त किया है कि वर्तमान में देश के पास मौजूद बंपर स्टॉक और लगातार हो रहे सुचारू आयात को देखते हुए पूरे सीजन के दौरान खाद की किल्लत या ब्लैक मार्केटिंग जैसी किसी भी समस्या की कोई विधिक या व्यावहारिक गुंजाइश नहीं है।

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