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Wednesday, June 24, 2026

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नागपुर में अस्पताल प्रशासक डॉक्टर की आत्महत्या, ‘एनेस्थीसिया’ का लिया ओवरडोज; ठाणे कोर्ट ने दुष्कर्म-दुराचार के आरोपी को किया बरी

नागपुर/मुंबई: महाराष्ट्र से इस वक्त अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़ी तीन अलग-अलग बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। नागपुर में एक निजी अस्पताल के प्रशासक (डॉक्टर) ने कथित तौर पर एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। वहीं, ठाणे की एक विशेष अदालत ने पोक्सो (POCSO) और दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में आरोपी को विधिक रूप से बरी कर दिया है। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट के बीच बालासाहेब ठाकरे की विरासत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

1. नागपुर: निजी अस्पताल के डॉक्टर ने किया सुसाइड; मानसिक तनाव की आशंका

नागपुर के धंतोली इलाके में सोमवार (22 जून 2026) को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक निजी अस्पताल में बतौर प्रशासक (Administrator) कार्यरत 42 वर्षीय डॉक्टर ने कथित तौर पर एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली।

  • घटना का विवरण: मृतक की पहचान मानेवाड़ा निवासी ईश्वरचंद चंदेवार के रूप में हुई है। पुलिस के विधिक बयान के अनुसार, डॉ. चंदेवार ने रविवार रात अपनी नियमित ड्यूटी पूरी की थी। इसके बाद सोमवार सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अपने निजी कमरे में एनेस्थीसिया का घातक इंजेक्शन खुद को लगा लिया।
  • दरवाजा तोड़कर घुसी पुलिस: सुबह 9 बजे तक जब डॉक्टर अपने कमरे से बाहर नहीं आए, तो अस्पताल के कर्मचारियों को चिंता हुई क्योंकि कमरा अंदर से पूरी तरह लॉक था। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर धंतोली थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कमरा खोला, जहां डॉक्टर बेसुध मिले। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल मृत घोषित कर दिया।
  • विधिक जांच: धंतोली पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु (ADR) का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक विधिक व पुलिस जांच में आत्महत्या के पीछे भारी मानसिक तनाव और कुछ पारिवारिक मुद्दे सामने आए हैं, हालांकि सटीक कारणों का पता विस्तृत फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा।

2. ठाणे विशेष अदालत: दुष्कर्म और पॉक्सो का आरोपी बरी; जांच अधिकारी की मौत बनी वजह

राज्य के एक अन्य महत्वपूर्ण विधिक घटनाक्रम में, ठाणे की एक विशेष अदालत ने सात वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और उसकी 73 वर्षीय बुजुर्ग दादी के साथ दुराचार करने के आरोपी को सभी विधिक धाराओं से बरी कर दिया है।

विशेष न्यायाधीश जी. टी. पवार ने अभियोजन पक्ष के अविश्वसनीय साक्ष्यों (Unreliable Evidence) और गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों (Procedural Lapses) का हवाला देते हुए आरोपी दिनेश शांताराम हुले उर्फ घुले को दोषमुक्त घोषित किया।

अदालत द्वारा आरोपी को बरी करने के मुख्य विधिक आधार:

  • केस की पृष्ठभूमि: अभियोजन के अनुसार, दिनेश हुले 3 अक्टूबर 2021 को ठाणे में पीड़ितों के घर में जबरन घुसा था, जहां उसने सोई हुई बच्ची का यौन उत्पीड़न किया और विरोध करने पर उसकी दादी से छेड़छाड़ की। पुलिस ने आईपीसी की धारा 376, 354, 452 और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
  • बाद में जोड़ी गई धाराएं: अदालत ने विधिक रूप से नोट किया कि शुरुआत में पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) केवल धारा 354 (छेड़छाड़) और 452 के तहत ही दर्ज की थी। गंभीर यौन उत्पीड़न (धारा 376) की कहानी बाद में जोड़ी गई प्रतीत होती है, जो मामले को संदिग्ध बनाती है।
  • जांच अधिकारी (IO) का निधन: केस की सुनवाई के दौरान मुख्य जांच अधिकारी की मृत्यु हो गई थी, जिसे अदालत ने बचाव पक्ष (Defense) के लिए एक गंभीर विधिक पूर्वाग्रह (Prejudice) माना क्योंकि आरोपी को गवाह से जिरह का विधिक अवसर नहीं मिल सका।
  • बयानों में विरोधाभास: पीड़िता के बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष दिए गए बयान और पुलिस को दिए गए विधिक बयानों में भारी अंतर पाया गया। बचाव पक्ष का यह तर्क अदालत ने स्वीकार कर लिया कि पानी के रिसाव (Water Leakage) को लेकर चल रहे आपसी दीवानी विवाद के कारण यह झूठा मामला गढ़ा गया था।

3. महाराष्ट्र की सियासत: संजय राउत और किरण पावसकर में जुबानी जंग

महाराष्ट्र में आगामी चुनावों से पहले वैचारिक जंग तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मंगलवार को एकनाथ शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता किरण पावसकर पर सीधा विधिक व राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि शिंदे गुट बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा और विचारों का सरेआम मजाक उड़ा रहा है, जो उनका सीधा अपमान है।

दूसरी तरफ, किरण पावसकर ने राउत के इन आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया। पावसकर ने विधिक व सार्वजनिक सफाई देते हुए कहा कि उनके पुराने बयान को जानबूझकर संदर्भ से हटाकर (Out of Context) पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि वे आज भी बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व और विचारों पर विधिक रूप से चल रहे हैं और उनके मन में बालासाहेब के प्रति अगाध सम्मान है, अतः उनके अपमान का प्रश्न ही नहीं उठता।

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