28 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ममता सरकार ने जारी किया बयान; 16 गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को अदालत से मिली जमानत
कोलकाता:
पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी कड़ा या दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि, राज्य सरकार ने यह भी पूरी तरह साफ कर दिया है कि यह छूट केवल वास्तविक छात्रों के लिए है और आपराधिक पृष्ठभूमि (Criminal Record) वाले असामाजिक तत्वों पर यह राहत लागू नहीं होगी।
गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग (Department of Home and Hill Affairs) ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और घटनाक्रम की समीक्षा के बाद निर्णय
राज्य सरकार ने बताया कि यह फैसला मामले के सभी कानूनी पहलुओं की गहन समीक्षा और 28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है:
- पत्रकारों पर हमला और केस दर्ज: बीते शुक्रवार को वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा सियालदह स्टेशन से एस्प्लेनेड तक एक विशाल मार्च निकाला गया था। इस दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने मीडियाकर्मियों पर हमला कर दिया था, जिसमें कई पत्रकार घायल हो गए थे।
- 16 लोग हुए थे गिरफ्तार: 26 जुलाई की शाम तक इस मामले में पुलिस की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके तहत 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
- कड़े कानून और जमानत: पुलिस ने शुरुआत में गिरफ्तार लोगों पर हाल ही में लागू किए गए सख्त गुंडा विरोधी कानूनों (Goonda Act) की धाराएं लगाई थीं। हालांकि, दो दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) पूरी होने के बाद अदालत ने मंगलवार को उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।
किसे मिलेगी राहत और किस पर होगी सख्त कार्रवाई?
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वास्तविक छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना है:
- छात्रों को सुरक्षा: राज्य सरकार के आदेशानुसार, नीट-यूजी धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसी भी छात्र को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा।
- आपराधिक तत्वों पर शिकंजा: जिन लोगों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसा भड़काने की कोशिश की है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई छूट नहीं मिलेगी और उन पर कानून सम्मत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन करें ताकि कानून-व्यवस्था भी बनी रहे और निर्दोष छात्रों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।

