28.5 C
Mumbai
Wednesday, July 29, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना अनुमति कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया शेयरिंग पर रोक

CJI सूर्यकांत की पीठ ने जारी किया अंतरिम आदेश; केंद्र, सभी हाई कोर्ट और गूगल-मेटा समेत सोशल मीडिया दिग्गजों को नोटिस

नई दिल्ली:

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाहियों के डिजिटल कंटेंट के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व लिखित अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की किसी भी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को डाउनलोड करने, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करने, उससे आर्थिक लाभ कमाने (Monetization) या अपलोड करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने देशभर की अदालतों में लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए एक समान राष्ट्रीय ढांचा लागू करने की मांग वाली रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम व्यवस्था दी।

किन-किन गतिविधियों पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना अदालती कार्यवाही की ऑडियो/वीडियो सामग्री के साथ निम्नलिखित गतिविधियों पर रोक रहेगी:

  • रिकॉर्डिंग को निकालना (Extract), डाउनलोड करना या स्टोर करना।
  • सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (यूट्यूब, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) पर पोस्ट, री-पोस्ट, अपलोड या ट्रांसमिट करना।
  • वीडियो/ऑडियो में बदलाव (Modify/Edit) करना या उसे होस्ट करना।
  • रिकॉर्ड किए गए कंटेंट से किसी भी प्रकार की कमाई (Commercialization/Monetization) करना।

मान्यता प्राप्त मीडिया को राहत:

पीठ ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का असर मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों (Recognized News Outlets) द्वारा अदालत की कार्यवाही की नियमित और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा।

सोशल मीडिया कंपनियों, केंद्र और सभी High Courts को बनाया पक्षकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों और प्रमुख टेक-कंपनियों को मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किए हैं:

  • तकनीकी व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म: गूगल (Google), यूट्यूब (YouTube), एक्स कॉर्प (X Corp), मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta – फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) और लिंक्डइन (LinkedIn)।
  • अन्य संस्थाएं: केंद्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI)।

केंद्र सरकार और हाई कोर्ट्स को विशेष निर्देश

  1. केंद्र सरकार के लिए निर्देश: भारत सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह याचिका में उठाई गई मांगों को लागू करने के लिए जिम्मेदार नोडल मंत्रालयों की पहचान करे और एक विस्तृत प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
  2. हाई कोर्ट्स से स्टेटस रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट से पूछा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तैयार किए गए ‘मॉडल नियमों’ (Model Rules) को अपनाने में क्या प्रगति की है। साथ ही, निर्बाध और निरंतर लाइव स्ट्रीमिंग के प्रभाव तथा उसकी व्यावहारिक (Practical) संभावनाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड होगा आदेश

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिए हैं कि आम जनता को जागरूक करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस आदेश को अपनी-अपनी आधिकारिक वेबसाइट्स पर प्रमुखता से अपलोड करेंगे।

इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को तय की गई है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here