दूरसंचार अधिकारी और फर्जी पुलिस बनकर की वीडियो कॉल, दो सप्ताह तक घर में बंधक बनाकर लूटी गाढ़ी कमाई
मुंबई: साइबर अपराधियों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को डरा-धमकाकर ठगी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुंबई साइबर पुलिस ने दहिसर निवासी 68 वर्षीय सेवानिवृत्त कारोबारी को लगभग दो सप्ताह तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर उनसे 1.12 करोड़ रुपये हड़पने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस गिरोह से जुड़े छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
आईआईटी स्नातक और निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान तारिक मोमिन, राकेश जैन, चिंतन देसाई, शकर त्यागी, जी गोहेल और अजय शर्मा के रूप में हुई है। इस गिरोह का नेटवर्क काफी पेशेवर है। पकड़े गए आरोपियों में जी गोहेल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से बीई की डिग्री हासिल कर चुका वेब डेवलपर है, जबकि शकर त्यागी एक प्रतिष्ठित निजी बैंक में ऑपरेशंस मैनेजर के पद पर कार्यरत था। यह गिरोह तकनीकी ज्ञान और बैंकिंग व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों को जाल में फंसाता था।
फर्जी पुलिस वर्दी और सरकारी लोगो दिखाकर बनाया शिकार पुलिस जांच के अनुसार, ठगों ने जुलाई और अगस्त के दौरान पीड़ित से संपर्क साधा था। शुरुआत में दूरसंचार विभाग का अधिकारी बनकर बुजुर्ग को बताया गया कि उनकी पहचान और आईडी विवरण का दुरुपयोग दिल्ली में दर्ज एक गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है। इसके बाद ‘विजय खन्ना’ नाम के एक शख्स ने पुलिस की वर्दी पहनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल की। कॉलिंग के दौरान सुप्रीम कोर्ट और सरकारी विभागों के फर्जी लेटरहेड व लोगो वाले दस्तावेज दिखाकर बुजुर्ग को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। भयभीत कर उन्हें दो सप्ताह तक घर में कैद रहने पर मजबूर किया गया और विभिन्न खातों में 1.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। पुलिस अब अन्य पीड़ितों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

