31.6 C
Mumbai
Saturday, June 13, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

CISF को मिले 200 नए जांबाज अधिकारी: हैदराबाद NISA में भव्य पासिंग आउट परेड; सुमित लठवाल को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बढ़ाई हौसला-अफजाई

हैदराबाद: देश के औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और संवेदनशील रणनीतिक बुनियादी ढांचों की सुरक्षा करने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कुनबे में आज बड़ी और आधुनिक ताकत जुड़ गई है। शनिवार (13 जून 2026) को सीआईएसएफ के प्रमुख और प्रतिष्ठित वैश्विक प्रशिक्षण संस्थान नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एकेडमी (NISA), हैदराबाद में एक भव्य और गरिमापूर्ण ‘पासिंग आउट परेड’ (दीक्षांत समारोह) का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक दीक्षांत परेड के साथ ही 39वें बैच के 76 असिस्टेंट कमांडेंट (UPSC चयनित) और 19वें बैच के 124 सब-इंस्पेक्टर (पूर्व सैनिक) समेत कुल 200 उच्च प्रशिक्षित अधिकारी औपचारिक रूप से भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की मुख्यधारा यानी सीआईएसएफ के सुरक्षा कवच में शामिल हो गए हैं। तेलंगाना के माननीय राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इस भव्य समारोह में बतौर मुख्य अतिथि (Chief Guest) शिरकत की और मार्च पास्ट की सलामी ली।

5 महिला अधिकारियों ने बढ़ाई शान; सुमित लठवाल को मिला ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’

सीआईएसएफ मुख्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस साल पास आउट होने वाले 76 असिस्टेंट कमांडेंट (Assistant Commandants) का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) परीक्षा के अत्यंत कठिन चरणों के जरिए हुआ है। इस गौरवशाली बैच की सबसे बड़ी खूबसूरती और ताकत यह है कि इसमें पांच जांबाज महिला अधिकारी भी देश की रक्षा के लिए कमान संभालने को तैयार हैं।

भव्य दीक्षांत परेड का ऑन-फील्ड नेतृत्व परेड कमांडर असिस्टेंट कमांडेंट मनीष कुमार राय और परेड 2-I/C असिस्टेंट कमांडेंट रोशनी देवी ने अत्यंत अनुशासित ढंग से किया। पूरे 57 हफ्तों के कड़े ट्रेनिंग सत्र के दौरान सभी इनडोर और आउटडोर विधाओं, सामरिक रणनीति और सैन्य विधा में शीर्ष प्रदर्शन करने के लिए असिस्टेंट कमांडेंट सुमित लठवाल को ‘ऑल राउंड बेस्ट’ (All Round Best Trainee) घोषित किया गया। राज्यपाल ने उन्हें बल की सबसे प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ (Sword of Honour) की चमचमाती तलवार सौंपकर सम्मानित किया।

‘ये सितारे रैंक नहीं, देश का विश्वास हैं’: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला
नए सैन्य और पुलिस अधिकारियों को राष्ट्र सेवा की शपथ दिलाने के बाद मुख्य अतिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा, “हैदराबाद के ऐतिहासिक ग्राउंड पर आज की यह भव्य परेड कड़े अनुशासन, अटूट समर्पण और बेमिसाल पेशेवर कुशलता का एक जीवंत उदाहरण है। सीआईएसएफ आज आधुनिक भारत के आंतरिक सुरक्षा ऊंचे ढांचे का एक सबसे मजबूत और अभेद्य स्तंभ बन चुका है, जो देश की वैश्विक आर्थिक प्रगति, औद्योगिक परिसंपत्तियों और आम जनता के अटूट भरोसे की चौबीसों घंटे रक्षा कर रहा है।” राज्यपाल ने नए कप्तानों को प्रेरित करते हुए आगे कहा, “आज आपके युवा कंधों पर लगे ये चमकते सितारे सिर्फ एक सरकारी रैंक या पदवी नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश का आपके प्रति विश्वास और आपकी सर्वोच्च जिम्मेदारी हैं। अपने नैतिक चरित्र, पूर्ण ईमानदारी और अदम्य साहस से भारतीय समाज के सामने एक नई मिसाल पेश करें।”

359 संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा; अब तकनीक और साइबर कमांडो से लैस हो रहा है बल

समारोह के दौरान सीआईएसएफ के महानिदेशक (DG) प्रवीर रंजन ने बल की वर्तमान रणनीतिक स्थिति और आधुनिकीकरण के एजेंडे का ब्योरा देश के सामने रखा। महानिदेशक ने गर्व जताते हुए बताया कि सीआईएसएफ वर्तमान में देश भर के 359 से अधिक अत्यंत संवेदनशील, वीवीआईपी और रणनीतिक ठिकानों (जैसे परमाणु संस्थान, अंतरिक्ष केंद्र, हवाई अड्डे, मेट्रो और बंदरगाह) की सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा तात्कालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य इस सुरक्षा बल को भविष्य के हाइब्रिड और डिजिटल सुरक्षा खतरों (Future Challenges) से निपटने के लिए पूरी तरह एआई (AI) और आधुनिक तकनीक से लैस बनाना है।

बल के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण की कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • ड्रोन और महिला कमांडो विंग: गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा आरटीसी (RTC) बहरोड़ को आधिकारिक तौर पर ‘रिमोट पायलट ट्रेनिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में तब्दील कर दिया गया है। वहीं, बेंगलुरु स्थित बल की 10वीं रिजर्व बटालियन को विशेष रूप से अत्याधुनिक ‘महिला कमांडो और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) ट्रेनिंग’ के लिए देश के एकमात्र समर्पित केंद्र के रूप में तेजी से विकसित किया गया है।
  • सेना के साथ ‘बैटल हार्डनिंग’: भारतीय सेना (Indian Army) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के साथ मिलकर चलाए गए विशेष ‘बैटल हार्डनिंग प्रोग्राम’ के तहत सीआईएसएफ के 2,643 जवानों को युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 4,500 से अधिक जवानों की जमीनी कार्यक्षमता बढ़ाई गई है, जबकि डिजिटल वॉरफेयर से निपटने के लिए 1,600 ‘साइबर कमांडो’ (Cyber Commandos) की एक विशेष फौज तैयार की गई है।
  • आईआईटी और प्रतिष्ठित संस्थानों से एमओयू: साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और एडवांस एयरोस्पेस सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमता को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए सीआईएसएफ ने देश के शीर्ष संस्थानों— NIT, NFSU, IIT मद्रास और IIITDM कांचीपुरम के साथ ऐतिहासिक अकादमिक समझौते (MoUs) किए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक्सीलेंस सेंटर: हैदराबाद का यह ‘निशा’ (NISA) संस्थान अब एक अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। यहां न केवल भारतीय बल्कि पड़ोसी मित्र देशों जैसे श्रीलंका और नेपाल के शीर्ष सैन्य व पुलिस अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन (Border Security) की वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • सर्वश्रेष्ठ ट्रेनिंग संस्थान व इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार: हैदराबाद का एनआईएसए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में दो बार प्रतिष्ठित ‘केंद्रीय गृह मंत्री ट्रॉफी फॉर बेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट’ से नवाजा जा चुका है। साल 2024 में कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन द्वारा इसे ‘उत्कृष्ट’ (Exemplary) रेटिंग दी गई थी। वहीं, बल के बुनियादी ढांचे को और बड़ा रूप देने के लिए बिहार सरकार ने किशनगंज में ‘7वें क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र’ के लिए 110 एकड़ की विशाल भूमि आवंटित की है

57 हफ्तों के कठिन प्रशिक्षण से निखरे ‘फ्यूचर रेडी’ कप्तान

पास आउट होने वाले इन असिस्टेंट कमांडेंट्स ने एनआईएसए में 57 हफ्तों (एक वर्ष से अधिक) का अत्यंत कठिन और कड़ा शारीरिक व मानसिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस दौरान उन्हें औद्योगिक सुरक्षा के वैश्विक नियम, विमानन सुरक्षा (Aviation Security), उन्नत आपदा प्रबंधन (Disaster Management), वीआईपी सुरक्षा, अर्बन कॉम्बैट ऑपरेशंस और दुनिया के सबसे आधुनिक स्वचालित हथियार चलाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। वहीं, सब-इंस्पेक्टर (पूर्व सैनिक) के स्पेशल बैच ने 21 हफ्तों का कड़ा री-ओरिएंटेशन कोर्स पूरा किया है।

इन सभी अधिकारियों को आधुनिक ‘कॉम्पीटेंसी-बेस्ड ट्रेनिंग’ (Competency-Based Training) पद्धति के तहत सिखाया गया है, ताकि वे किसी भी आतंकी हमले, बंधक संकट या विपरीत परिस्थितियों में बिना समय गंवाए ऑन-द-स्पॉट त्वरित और सटीक विधिक फैसले ले सकें। ये सभी नए फरिश्ते अब भारतीय सीपोर्ट्स (समुद्री बंदरगाह) और देश की अति संवेदनशील जेल सुरक्षा जैसी नई और उभरती रणनीतिक जिम्मेदारियों को पूर्णतः संभालने के लिए रणक्षेत्र में उतरने को तैयार हैं।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here