उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में लंबे समय से गिरावट जारी, अत्यधिक दोहन बना प्रमुख कारण
नई दिल्ली: देश में भूमिगत जल संसाधनों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारत के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में भूजल स्तर में लंबे समय से दर्ज की जा रही निरंतर गिरावट के बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है। वैश्विक जल संसाधनों पर केंद्रित इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता की तुलना में पानी की निकासी कहीं अधिक तेजी से हो रही है, जिससे जल स्तर खतरनाक रूप से गिरता जा रहा है।
सामान्य औसत से नीचे बना हुआ है भूजल स्तर डब्ल्यूएमओ की ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित विश्व के कई प्रमुख क्षेत्रों में भूजल का स्तर लगातार कई वर्षों से सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जमीन से जितना पानी विभिन्न जरूरतों के लिए निकाला जा रहा है, प्राकृतिक बारिश या अन्य जल स्रोतों से उसका पुनर्भरण (रिचार्ज) उस अनुपात में नहीं हो पा रहा है। इस असंतुलन की वजह से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
दुनिया भर में अत्यधिक दोहन से गहराया संकट रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 की अवधि के दौरान भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में भी भूजल की गंभीर कमी दर्ज की गई है। अध्ययन में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में अनियंत्रित और अत्यधिक भूजल दोहन ही इस संकट की मुख्य वजह है। जल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्राकृतिक पुनर्भरण और जल संरक्षण के लिए तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कृषि और पेयजल सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

