मुंबई/कोच्चि: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बैंक लोन धोखाधड़ी (Bank Fraud) के एक बड़े मामले में शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को महाराष्ट्र और केरल में एक साथ बड़ी विधिक कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक प्राइवेट कंपनी के निदेशकों (Directors) से जुड़े मुंबई और कोच्चि स्थित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। आरोपियों पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को 133.52 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप है।
1. आपराधिक साजिश और वित्तीय हेरफेर का मामला
सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक विधिक बयान के अनुसार, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी बैंक के साथ धोखाधड़ी की:
- गलत वित्तीय जानकारी: आरोपियों ने एसबीआई से अपनी पात्रता से कहीं अधिक क्रेडिट सुविधाएं (Credit Facilities) और लोन हासिल करने के लिए एक आपराधिक साजिश रची।
- दस्तावेजों में हेरफेर: बैंक को गुमराह करने के उद्देश्य से कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड, बैलेंस शीट और अन्य विधिक दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया और विभिन्न मौकों पर बैंक प्रबंधन को झूठी सूचनाएं दी गईं।
2. एसबीआई की शिकायत पर 9 जुलाई को दर्ज हुई विधिक FIR
इस बैंकिंग घोटाले की विधिक कड़ियां और एफआईआर (FIR) से जुड़े मुख्य विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट हैं:
| मुख्य पहलू | मामले का विधिक और प्रशासनिक विवरण |
|---|---|
| शिकायतकर्ता | स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट (SAM) ब्रांच, मुंबई। |
| मामला दर्ज होने की तिथि | 9 जुलाई 2026 (शिकायत की आधिकारिक विधिक समीक्षा के बाद)। |
| नामजद आरोपी | प्राइवेट कंपनी के निदेशक, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी (बैंक अधिकारी) और अज्ञात निजी व्यक्ति। |
| कुल घोटाला राशि | 133.52 करोड़ रुपये का बैंक को प्रत्यक्ष और गलत तरीके से नुकसान। |

