कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासी जमीन पर राजनीतिक भूचाल के बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘दीदी’ की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और बेहद संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर एक विस्फोटक पोस्ट और वीडियो साझा करते हुए सनसनीखेज दावा किया है। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ पिछले 20 वर्षों ($20\text{ Years}$) से साये की तरह तैनात रहने वाले उनके सबसे भरोसेमंद निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) को बुधवार (17 जून 2026) की रात अचानक उनके कोलकाता स्थित हरीश चटर्जी स्ट्रीट आवास से हटा दिया गया।
रात 9:30 बजे अचानक हटा ली गई सुरक्षा, गेट पर नहीं था कोई पहरा
सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर घटना की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एक वीडियो साक्ष्य पेश किया। उन्होंने बताया:
- आकस्मिक कार्रवाई: बुधवार की रात करीब 9:30 बजे सुरक्षा घेरे में यह अचानक और अभूतपूर्व कटौती की गई।
- असुरक्षित परिसर: जिस समय पीएसओ को हटाया गया, उस समय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने घर के भीतर ही मौजूद थीं। हैरान करने वाली बात यह थी कि उनके आवास के मुख्य प्रवेश द्वार (Entry Gate) पर सुरक्षा का कोई वैकल्पिक इंतजाम या पहरा मौजूद नहीं था।
‘सुरक्षा के लिए मैंने अपनी निजी कार को गेट पर अड़ाया’ — डेरेक ओ’ब्रायन
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बेहद गंभीर स्थिति का ब्योरा देते हुए दावा किया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नदारद देखा, तो वे दंग रह गए। दीदी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तुरंत अपनी निजी कार को आवास के मुख्य गेट के ठीक सामने आड़ा तिरछा खड़ा कर दिया, ताकि घर के अंदर जाने वाले मुख्य मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सके और कोई भी संदिग्ध व्यक्ति अंदर न घुस पाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पूरी संदिग्ध स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया है और वे बहुत जल्द इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक फेसबुक पेज से ‘लाइव’ आकर जनता के सामने सच रखेंगे।
टीएमसी ने बताया ‘गंभीर सुरक्षा चूक’; प्रशासन की चुप्पी से गहराया रहस्य
इस अचानक हुए घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य के गृह विभाग और वर्तमान प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र पर बेहद तीखे सवाल उठाए हैं। टीएमसी इस पूरे मामले को पूर्व मुख्यमंत्री के जीवन के साथ खिलवाड़ और एक ‘गंभीर सुरक्षा चूक’ (Major Security Lapse) के रूप में देश के सामने पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते एक जनप्रिय नेता की सुरक्षा को जानबूझकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
दूसरी ओर, एक पूर्व मुख्यमंत्री और बेहद संवेदनशील श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता से जुड़ा मामला होने के बावजूद, खबर लिखे जाने तक राज्य की सुरक्षा एजेंसियों, कोलकाता पुलिस या स्थानीय प्रशासन की तरफ से इस पर कोई भी आधिकारिक विधिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। प्रशासनिक चुप्पी के कारण इस मुद्दे के आने वाले दिनों में एक बड़ा राष्ट्रीय और राजनीतिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।

