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Wednesday, July 8, 2026

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इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी का संबोधन: बीजू पटनायक के साहसिक डकोटा मिशन को किया याद; नेहरू की ऐतिहासिक योजना का जिक्र नहीं

जकार्ता/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को इंडोनेशिया की संसद (Parliament of Indonesia) को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक व कूटनीतिक संबंधों को रेखांकित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी और जांबाज पायलट बीजू पटनायक के उस अदम्य साहस को याद किया, जिसने इंडोनेशिया की आजादी की लड़ाई का रुख बदल दिया था।

प्रधानमंत्री ने उस जांबाज अभियान का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत बीजू पटनायक डच सेना की धमकियों को दरकिनार कर इंडोनेशिया के तत्कालीन शीर्ष नेताओं को सुरक्षित भारत लेकर आए थे। हालांकि, इस पूरे मिशन की रूपरेखा तैयार करने वाले भारत के तत्कालीन अंतरिम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख पीएम मोदी के भाषण में नहीं था।

1. जुलाई 1947: नेहरू का वो बेहद खुफिया और जोखिम भरा मिशन

इस ऐतिहासिक कूटनीतिक मिशन की पृष्ठभूमि भारत की स्वतंत्रता से ठीक पहले तैयार हुई थी:

  • जिम्मेदारी: जुलाई 1947 में भारत की अंतरिम सरकार के प्रमुख जवाहरलाल नेहरू ने 31 वर्षीय युवा और कुशल पायलट बीजू पटनायक को एक अत्यंत गोपनीय और खतरनाक मिशन सौंपा।
  • उद्देश्य: डच (नीदरलैंड) औपनिवेशिक सेना द्वारा बंधक बनाए जाने के खतरे के बीच इंडोनेशिया के शीर्ष नेताओं को सुरक्षित बाहर निकालना था, ताकि वे वैश्विक मंच पर डच दमन को उजागर कर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा सकें।

2. पत्नी ज्ञानवती के साथ ‘डकोटा’ विमान उड़ाकर जकार्ता पहुंचे बीजू

इस साहसिक हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन का तकनीकी और रणनीतिक घटनाक्रम इस प्रकार था:

$$\text{ऐतिहासिक डकोटा मिशन (1947)} \begin{cases} \text{1. विमान फ्लीट:} & \text{डगलस सी-47 ‘डकोटा’ (Douglas C-47 Dakota) सैन्य परिवहन विमान।} \\ \text{2. सह-पायलट:} & \text{बीजू पटनायक के साथ उनकी पत्नी **ज्ञानवती पटनायक** ने सह-पायलट की भूमिका निभाई।} \\ \text{3. डच चुनौती:} & \text{डच सेना ने विमान को मार गिराने की धमकी दी; पटनायक ने भारतीय हवाई क्षेत्र में डच विमानों को रोकने की जवाबी चेतावनी दी।} \\ \text{4. सफल रेस्क्यू:} & \text{जकार्ता के पास गुप्त हवाई पट्टी पर लैंडिंग कर **24 जुलाई 1947** को नेताओं को सुरक्षित नई दिल्ली पहुंचाया।} \end{cases}$$

3. नई दिल्ली में गोपनीय बैठक और संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्टैंड
सुरक्षित दिल्ली पहुंचने के बाद इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री सुतन स्याहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता ने जवाहरलाल नेहरू के साथ उच्च स्तरीय गोपनीय बैठकें कीं। इसके बाद ही इंडोनेशिया का मुद्दा वैश्विक पटल पर गर्माया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में इंडोनेशिया की संप्रभुता का पुरजोर समर्थन किया। इस चौतरफा अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए आखिरकार 27 दिसंबर 1949 को नीदरलैंड ने इंडोनेशिया की आजादी को आधिकारिक मान्यता दे दी।

4. इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भूमि पुत्र’

इंडोनेशियाई सरकार ने बीजू पटनायक के इस ऋण को हमेशा याद रखा। उन्हें न केवल मानद इंडोनेशियाई नागरिकता दी गई, बल्कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘भूमि पुत्र’ (Bhumiputra) से भी नवाजा गया।

संसद में अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की यात्राएं और लोकतांत्रिक मूल्य लगभग एक जैसे हैं, और बीजू पटनायक का साहस दोनों देशों के बीच अटूट मित्रता का प्रतीक है।

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