दो आयुक्तों की लिखित आपत्तियों की खबरों से गरमाई सियासत, आयोग ने आंतरिक विचार-विमर्श को बताया स्वाभाविक
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों की खबरों ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े कई प्रशासनिक फैसलों, मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीकरण और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। इस खुलासे के बाद निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया कि आयोग में निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक है और सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
चुनाव आयोग ने अपनी सफाई में कहा कि किसी भी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में नीति-निर्माण और मसौदा तैयार करने के दौरान सदस्यों द्वारा सवाल उठाना, सुझाव देना, तकनीकी जांच-पड़ताल और अलग-अलग राय रखना एक सामान्य और स्वस्थ आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि आंतरिक नोटों को अलग करके देखना पूरी तस्वीर को पेश नहीं करता। आयोग के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत तय वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही अंतिम आदेश जारी किए जाते हैं और एसआईआर समेत हालिया चुनावी सुधारों के सभी फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लागू हुए हैं।
संवैधानिक व्यवस्था के तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय है। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और दो चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। तीनों आयुक्तों का दर्जा, अधिकार और वेतन-भत्ते सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समकक्ष और समान होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन उनके पास एकतरफा वीटो शक्ति नहीं होती; आयोग में कोई भी नीतिगत निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर ही मान्य होता है।
वर्तमान में आयोग के शीर्ष पद पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कार्यरत हैं, जबकि डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी बतौर चुनाव आयुक्त जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। आयोग में नियुक्ति से पूर्व इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों का प्रशासनिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है। 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। वहीं, 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के आईएएस डॉ. सुखबीर सिंह संधू भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन और उत्तराखंड के मुख्य सचिव जैसे अहम पदों पर रहे हैं। 1989 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस डॉ. विवेक जोशी भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (आरजीआई) तथा केंद्रीय वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और भारी उद्योग मंत्रालय में सचिव के दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं।

