तीन सदस्यीय समिति का निष्कर्ष, स्टोर रूम से मिली नकदी पर संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहे जस्टिस वर्मा
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से अघोषित नकदी मिलने के मामले में अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी है। समिति ने अपनी जांच में निष्कर्ष निकाला है कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ बिना हिसाब वाली नकदी, सबूतों से छेड़छाड़ और संतोषजनक स्पष्टीकरण न दे पाने के आरोप पूरी तरह ‘साबित’ होते हैं।
‘जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट’ के तहत बनाई गई इस समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी थी, जिसे अब संसद के पटल पर रखा गया है। पीटीआई के अनुसार, यह रिपोर्ट दो खंडों में तैयार की गई है, जिसमें मौखिक बयान और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं।
साक्ष्यों और परिस्थितियों में पाई गईं गंभीर गड़बड़ियां समिति के अनुसार, जस्टिस वर्मा अपने आवास के स्टोर रूम से बरामद नकदी के स्रोत, मौजूदगी और मालिकाना हक के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इसके अलावा, रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखा गया। विधिक रूप से सील करने और आधिकारिक निरीक्षण की प्रक्रिया से पहले ही स्टोर रूम में रखे सबूतों की स्थिति में बदलाव किया गया था, जो जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास दर्शाता है।

