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Sunday, July 19, 2026

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अयोध्या विवाद में नया मोड़: निर्मोही अखाड़ा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन और पूजा के अधिकार की मांग

नई दिल्ली: श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े ने शीर्ष अदालत में एक नई याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि 9 नवंबर 2019 को आए अयोध्या मामले के ऐतिहासिक फैसले का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। याचिका के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अखाड़े को राम मंदिर के प्रबंधन में उचित भूमिका और प्रतिनिधित्व देने की बात कही थी, जिसे अब तक अमल में नहीं लाया गया है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग

निर्मोही अखाड़े का कहना है कि केंद्र सरकार ने अदालती निर्देश के बाद ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन तो कर दिया, लेकिन इसकी संरचना में अखाड़े को वह स्थान और सम्मान नहीं मिला जिसका आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। अखाड़े ने मांग की है कि मौजूदा ट्रस्ट का पुनर्गठन कर इसे एक ‘सार्वजनिक ट्रस्ट’ (पब्लिक ट्रस्ट) बनाया जाए, ताकि इसके कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो सके।

याचिका में तर्क दिया गया है कि सरकार द्वारा किसी एक व्यक्ति को ट्रस्ट में नामित कर देना निर्मोही अखाड़े का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं है। अखाड़े की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, उनके प्रतिनिधियों का चयन ‘पंचायत व्यवस्था’ के तहत सामूहिक रूप से किया जाता है, न कि सरकार के मनोनयन से।

‘पारंपरिक पूजा और सेवा का मिले अधिकार’

अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उसे राम मंदिर में पूजा, सेवा, भोग, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को अपनी पारंपरिक पद्धति से संचालित करने का अधिकार दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि वे सदियों से रामानंदी परंपरा के तहत भगवान राम की सेवा से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनकी इस धार्मिक भूमिका को बहाल किया जाना चाहिए।

मूल मूर्तियों और वित्तीय प्रबंधन पर उठाए सवाल

निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में कई गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं:

  • मूल मूर्तियों की पुनर्स्थापना: अखाड़े का दावा है कि ट्रस्ट को केवल मंदिर के प्रशासनिक कार्यों का अधिकार था, मूल विग्रह (मूर्तियों) को बदलने का नहीं। मांग की गई है कि मूल मूर्तियों को दोबारा गर्भगृह में स्थापित किया जाए या फिर उन्हें अखाड़े को सौंप दिया जाए।
  • पारदर्शिता और ऑडिट: हाल के दिनों में मंदिर के दान और कीमती सामानों के प्रबंधन को लेकर सामने आए विवादों का जिक्र करते हुए अखाड़े ने ट्रस्ट के कामकाज की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। हालांकि, ये सभी आरोप अखाड़े के निजी दावे हैं और इन पर अदालत की कोई टिप्पणी नहीं आई है।

सुप्रीम कोर्ट से निर्मोही अखाड़े की प्रमुख मांगें

याचिका के जरिए शीर्ष अदालत से निम्नलिखित निर्देश जारी करने की अपील की गई है:

  • पब्लिक ट्रस्ट का गठन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पुनर्गठित कर सार्वजनिक ट्रस्ट का रूप दिया जाए।
  • उचित प्रतिनिधित्व: ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में निर्मोही अखाड़े को उनकी परंपरा के अनुसार स्थान मिले।
  • धार्मिक भूमिका की मान्यता: मंदिर की पूजा-पाठ और पारंपरिक अनुष्ठानों में अखाड़े की हिस्सेदारी तय हो।
  • स्वतंत्र समिति और फोरेंसिक ऑडिट: 2019 के फैसले के अनुपालन की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए और ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

निर्मोही अखाड़े की इस नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि अयोध्या मामले के प्रबंधन को लेकर अदालत का क्या रुख रहता है।

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