27.7 C
Mumbai
Sunday, July 19, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

संसद मानसून सत्र 2026: ‘खबरों के खिलाड़ी’ में वरिष्ठ पत्रकारों ने टटोली सियासी नब्ज, परिसीमन बिल पर बड़ी भविष्यवाणियां

नई दिल्ली: 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को लेकर देश का सियासी पारा गरमा चुका है। पिछले सत्र में संख्या बल की कमी के कारण गिरे ‘महिला आरक्षण परिसीमन विधेयक’ को सरकार द्वारा दोबारा लाए जाने की अटकलों के बीच, इस बार का सत्र कैसा रहेगा और विपक्ष की क्या रणनीति होगी? इन तमाम पहलुओं पर वरिष्ठ पत्रकारों के प्रसिद्ध पैनल ‘खबरों के खिलाड़ी’ में तीखी और सारगर्भित चर्चा हुई। इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और मिहिर रंजन ने अपने विचार रखे।

चर्चा के मुख्य बिंदु और विश्लेषकों की राय इस प्रकार है:

क्या दोबारा पेश होगा परिसीमन बिल?

वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस बार बिना पूरी तैयारी के कदम नहीं बढ़ाएगी।

  • मिहिर रंजन के अनुसार, “भाजपा इस मुद्दे पर पहले से कुछ नहीं बोलेगी, लेकिन उसकी आंतरिक तैयारियां पूरी होंगी। कांग्रेस इसका मुखर विरोध कर रही है, लेकिन अन्य विपक्षी दलों का रुख उतना कड़ा नहीं है। सरकार इस बिल को तभी दोबारा पटल पर रखेगी जब उसे संख्या बल का पूर्ण भरोसा होगा।”
  • पूर्णिमा त्रिपाठी ने कहा कि पिछले सत्र के मुकाबले इस बार राजनीतिक हालात काफी बदल चुके हैं। विपक्षी खेमे में बिखराव साफ दिख रहा है। अगर सरकार इस सत्र में परिसीमन बिल लाती है, तो इसके पास होने की पूरी संभावना है और यह देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव साबित होगा।

विपक्षी एकजुटता और क्षेत्रीय दलों की लाचारी

सत्र से ठीक पहले विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के भीतर चल रहे आंतरिक संकट को विश्लेषकों ने बारीकी से रेखांकित किया।

  • विनोद अग्निहोत्री का विश्लेषण है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों और टीएमसी में हालिया टूट के बाद विपक्षी गठबंधन गहरे संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले सत्र में विपक्ष के जो आक्रामक तेवर दिखे थे, वे अब गायब रहेंगे। शिवसेना (UBT) में टूट के बाद एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके भी अपने-अपने रास्ते तलाश रहे हैं। ऐसे में सरकार तभी बिल लाएगी जब वह 365 से अधिक का आंकड़ा जुटा लेगी।”
  • अनुराग वर्मा ने क्षेत्रीय दलों की मजबूरी पर बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी अपनी राजनीति के तहत विरोध जारी रखेंगे, लेकिन क्षेत्रीय दल ज्यादा समय तक सत्ता से दूर नहीं रह सकते। टीएमसी में जो हुआ, उसके बाद हर क्षेत्रीय पार्टी को अपनी स्थिति का डर है। वे अंततः सत्तापक्ष के पाले में जा सकते हैं।”

सरकार का टारगेट 400 पार!

  • राकेश शुक्ल ने इस बात पर संशय जताया कि परिसीमन बिल के मुद्दे पर अखिलेश यादव कांग्रेस का साथ देंगे। उनके मुताबिक, सरकार की इस बार दो बड़ी प्राथमिकताएं हैं—पहली, विपक्षी पार्टियों से परिसीमन बिल पर खुला समर्थन हासिल करना और दूसरी, सदन में अपने संख्या बल को केवल 360 के पार ही नहीं, बल्कि 400 के करीब पहुंचाना।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here