चेन्नई: तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेता विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पारी की शुरुआत एक अत्यंत आक्रामक और भावनात्मक शैली में की है। शपथ ग्रहण के बाद उनके पहले भाषण और सचिवालय की गतिविधियों को राज्य की भविष्य की राजनीति के लिए एक बड़े ‘शक्ति प्रदर्शन’ और ‘नया विजन’ के रूप में देखा जा रहा है।
साठ साल के द्रविड़ वर्चस्व को चुनौती विजय ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही पिछले साठ वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज दो मुख्य दलों—डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK)—के राजनीतिक वर्चस्व को आधिकारिक रूप से चुनौती दे दी है। उनके पहले दिन के कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी राजनीति द्रविड़ राजनीति के स्थापित ढांचों से अलग होने वाली है।
वित्तीय स्थिति पर हमला और ‘श्वेत पत्र’ की मांग अपने पहले भाषण में विजय का सबसे कड़ा प्रहार राज्य की आर्थिक स्थिति पर था। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की आलोचना करते हुए कहा:
- “पिछली सरकार ने खजाना खाली कर दिया और चली गई।”
- मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर तत्काल एक ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की घोषणा की, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
भावनात्मक अपील और ‘आम आदमी’ की छवि विजय ने खुद को एक “आम आदमी” के रूप में पेश करते हुए जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने अपने संबोधन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:
- धर्मनिरपेक्षता: अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए किए गए वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता।
- समावेशी विकास: सरकारी योजनाओं को सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचाने का संकल्प।
- गठबंधन की राजनीति: भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और सहयोग पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
प्रतीकात्मक कार्य और श्रद्धांजलि शपथ ग्रहण के बाद विजय सचिवालय पहुँचे और आधिकारिक तौर पर कामकाज संभाला। हालांकि, उनकी सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि पेरियार स्मारक का दौरा रही। पेरियार को श्रद्धांजलि देकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे राज्य के सामाजिक न्याय की जड़ों से जुड़े रहेंगे, भले ही उनकी राजनीतिक शैली और एजेंडा पारंपरिक द्रविड़ दलों से अलग हो।
मुख्यमंत्री विजय के पहले दिन के इन कदमों ने यह साफ कर दिया है कि तमिलनाडु की अगली राजनीतिक दिशा न केवल पिछली गलतियों को उजागर करने वाली होगी, बल्कि यह ‘जन-केंद्रित’ और ‘पारदर्शी’ शासन की ओर बढ़ने का दावा करेगी।

