नई दिल्ली: देश में जमीन से लगातार अत्यधिक पानी निकाला जाना (भूजल दोहन) अब भी एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार ने राज्यसभा में सूचित किया है कि देश की लगभग 11 प्रतिशत भूजल आकलन इकाइयों में सालाना रीचार्ज (जमीन में वापस पहुंचने वाले पानी) की तुलना में कहीं अधिक पानी निकाला जा रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले 8 वर्षों के दीर्घकालिक आंकड़ों को देखें तो देश की कुल भूजल स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है।
भूजल आकलन इकाइयों की वर्तमान स्थिति
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, देश की कुल 6,762 भूजल संसाधन आकलन इकाइयों (ब्लॉक, तालुक और मंडल) का वर्गीकरण इस प्रकार है:
| श्रेणी (Category) | इकाइयों की संख्या | स्थिति का मतलब |
| ओवर-एक्सप्लॉइटेड (Over-exploited) | 730 (10.8%) | सालाना रीचार्ज से अधिक पानी निकाला जा रहा है। |
| क्रिटिकल (Critical) | 201 | भूजल का स्तर अत्यंत चिंताजनक स्थिति में है। |
| सेमी-क्रिटिकल (Semi-critical) | 758 | दोहन का स्तर सावधानी बरतने योग्य सीमा पर है। |
| सुरक्षित (Safe) | 4,946 | इन इलाकों में फिलहाल भूजल की स्थिति नियंत्रण में है। |
| खारे पानी वाली (Saline) | 127 | यहाँ का भूजल खारा (नमकीन) है। |
राज्यों की स्थिति: पंजाब सबसे आगे, दिल्ली-हिमाचल में बड़ा सुधार
वर्ष 2025 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में भूजल दोहन (Groundwater Extraction) के मामले में उत्तर-पश्चिम भारत के राज्य सबसे आगे हैं:
- सबसे प्रभावित राज्य: पंजाब में भूजल दोहन का स्तर सबसे अधिक 156.36% दर्ज किया गया है। इसके बाद राजस्थान (147.11%) दूसरे और हरियाणा (136.75%) तीसरे स्थान पर हैं। (100% से अधिक का मतलब है कि जितना पानी जमीन के अंदर जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा बाहर निकाला जा रहा है)।
- दिल्ली में सुधार: देश की राजधानी में स्थिति सुधरी है। दिल्ली में भूजल दोहन का स्तर जो 2017 में 119.61% था, वह 2024 में घटकर 100.77% और 2025 में और कम होकर 92.10% पर आ गया है।
- हिमाचल प्रदेश में उल्लेखनीय प्रगति: हिमाचल प्रदेश में सबसे बेहतरीन सुधार देखा गया, जहां भूजल दोहन का स्तर 2017 के 86.37% से भारी गिरावट के साथ 2025 में महज 38.50% रह गया है।
राष्ट्रीय औसत का ट्रेंड: राष्ट्रीय स्तर पर भूजल दोहन का आंकड़ा 2017 में 63.33% था, जो 2024 में घटकर 60.48% हुआ और 2025 में मामूली बढ़कर 60.63% दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, 2017 की तुलना में दीर्घकालिक सुधार साफ दिखता है।
भूजल संरक्षण के लिए सरकार के प्रमुख प्रयास
चूंकि जल (Water) राज्य सूची का विषय है, इसलिए मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। हालांकि, केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय मदद दे रही है, जिसके तहत कई बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं:
- जल शक्ति अभियान: इसके तहत देश भर में अब तक 2 करोड़ से अधिक जल संरक्षण और कृत्रिम भूजल पुनर्भरण (Artificial Groundwater Recharge) के कार्य पूरे किए गए हैं।
- जल संचय जन भागीदारी पहल: वर्ष 2024 में शुरू की गई इस मुहिम के तहत 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं।
- अटल भूजल योजना: यह योजना देश के 7 राज्यों के 80 जिलों की 8,203 भारी जल संकट से जूझ रही ग्राम पंचायतों में जमीन पर लागू है।
- अमृत सरोवर मिशन: इसके तहत देश भर में लगभग 69,000 अमृत सरोवरों (तालाबों) का निर्माण या उनका जीर्णोद्धार (पुनर्जीवन) किया गया है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जा सके और भूजल स्तर को सुधारा जा सके।

