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Monday, July 13, 2026

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बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की जंग: ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा—’हम ही असली TMC’, अलीपुर अदालत के आदेश का दिया हवाला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और सत्तारूढ़ खेमे के भीतर एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी आंतरिक वर्चस्व की लड़ाई के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने रविवार (12 जुलाई 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए खुद को पार्टी की ‘असली और वैध’ इकाई घोषित कर दिया है।

अलीपुर अदालत के एक हालिया विधिक आदेश का हवाला देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 22 जून 2026 को गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति और उसके अध्यक्ष अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति ही तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र विधिक और अधिकृत समिति है। इस बड़े राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल तृणमूल गुट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या विधिक बयान सामने नहीं आया है।

1. ऋतब्रत बनर्जी गुट के विधिक और संगठनात्मक दावे

कोलकाता में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी के नाम, फंड और संपत्तियों पर पूर्ण विधिक अधिकार जताते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:

  • अदालत का विधिक संरक्षण: तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा दायर एक दीवानी मामले की सुनवाई के बाद अलीपुर अदालत ने स्पष्ट किया है कि 22 जून को गठित समिति ही कानूनी रूप से मान्य है।
  • पदभार पर रोक: अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति या समूह खुद को तृणमूल कांग्रेस का पदाधिकारी घोषित नहीं कर सकता और न ही पार्टी के नाम पर कोई संगठनात्मक या प्रशासनिक निर्णय लेने का विधिक अधिकार रखता है।
  • चुनाव आयोग का रुख: अदालत के इस आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त होते ही इसे तुरंत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को भेजा जाएगा, ताकि पार्टी के नाम और सिंबल पर उनकी वैधता के दावे को पूर्ण विधिक मजबूती मिल सके।

2. पार्टी फंड, बैंक खातों और ‘तृणमूल भवन’ पर कानूनी नियंत्रण

पार्टी की संपत्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा किए गए दावों की रूपरेखा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

विवादित संपत्ति / वित्तीय ढांचाऋतब्रत गुट का दावा (अदालत के आदेशानुसार)भावी विधिक एवं दंडात्मक रणनीति
बैंक खाते और पार्टी फंडकेवल अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति को ही पार्टी के सभी बैंक खातों, फंड और विधिक रिकॉर्ड्स के उपयोग का अनन्य अधिकार है।कोई भी अन्य व्यक्ति या बाहरी गुट तृणमूल के नाम पर वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकेगा।
मेट्रोपॉलिटन तृणमूल भवनकोलकाता स्थित मुख्य पार्टी मुख्यालय (‘तृणमूल भवन’) का उपयोग केवल इस नई समिति के विधिक सदस्य ही कर सकते हैं।यदि कोई अन्य समूह कार्यालय पर कब्जा करने या इस्तेमाल करने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई (Legal Action) की जाएगी।

3. तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व संकट की कड़ियां

22 जून के बाद से पार्टी के भीतर उपजे इस अप्रत्याशित संकट के मुख्य विधिक आयाम इस प्रकार हैं:

TMC आंतरिक संकट का ढांचा⎩⎧​1. सांविधानिक चुनौती:2. चुनाव आयोग की भूमिका:3. प्रशासनिक असमंजस:​ममता बनर्जी के सर्वमान्य नेतृत्व को पहली बार पार्टी के भीतर से ही अदालत के जरिए चुनौती दी गई है।आगामी दिनों में पार्टी के नाम और आधिकारिक सिंबल (चिह्न) को लेकर ’असली कौन’ की विधिक जंग शुरू होगी।पार्टी कैडर और जिला समितियों के बीच फंड व भवनों के नियंत्रण को लेकर जमीनी टकराव के संकेत हैं।​

4. राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल, ममता गुट के अगले कदम पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलीपुर अदालत के इस फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक नए और अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। सालों तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी के खेमे की चुप्पी यह संकेत देती है कि वे इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में अपील दायर करने के लिए एक मजबूत विधिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह लड़ाई न केवल कोर्ट रूम में, बल्कि चुनाव आयोग के गलियारों और बंगाल की सड़कों पर भी और तेज होने की पूरी संभावना है।

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