चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मोदी-शाह की जांच की मांग; मुस्लिम, एससी, एसटी और ओबीसी को निशाना बनाने का दावा
नई दिल्ली/बेलगावी: कर्नाटक के बेलगावी जिले में मतदाता सूची को लेकर छिड़ा सियासी विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि बेलगावी में ‘फॉर्म-7’ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर लगभग 15 हजार मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप हटाने की सुनियोजित साजिश रची गई। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को ‘वोट चोरी’ का संगठित प्रयास करार देते हुए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने बयान में सिलसिलेवार आरोप लगाते हुए कहा कि 22, 23 और 24 सितंबर—इन महज तीन दिनों के भीतर बेलगावी में करीब 15 हजार मतदाताओं के नाम विलोपित करने के लिए भारी संख्या में फॉर्म-7 के आवेदन दाखिल किए गए। उन्होंने रेखांकित किया कि इन थोक आवेदनों का मुख्य निशाना मुस्लिम, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले मतदाता थे। कांग्रेस नेता का दावा है कि ये सामाजिक वर्ग बड़ी संख्या में भाजपा के विरोध में मतदान करते हैं, इसलिए एक तय रणनीति के तहत उनके मताधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत ‘फॉर्म-7’ का उपयोग मतदाता सूची से किसी मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्ति का नाम हटाने अथवा किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए वैधानिक तौर पर किया जाता है। हालांकि, इतने कम समय में हजारों की संख्या में फॉर्म-7 का जमा होना प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े सवालों को जन्म दे रहा है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि यह सामान्य नागरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि डाटा में हेरफेर कर विपक्ष समर्थक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का संगठित षड्यंत्र है, जिस पर चुनाव आयोग को पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।

