दस्तावेज जुटाने के लिए लोकसभा सचिवालय से गुहार, एनसीपीआई संसदीय अध्यक्ष ने दी जानकारी
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले 20 लोकसभा सांसदों ने अपनी सदस्यता रद्द किए जाने संबंधी नोटिस पर लोकसभा सचिवालय से अतिरिक्त मोहलत की मांग की है। इन सभी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत जारी अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए पहले 22 सितंबर तक की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की गई थी, जिसे अब चार सप्ताह और बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध किया गया है।
एनसीपीआई की संसदीय अध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार ने इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि सांसदों को अपने विस्तृत और विधिक जवाब के समर्थन में कई जरूरी साक्ष्य और कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। चूंकि इतने कम समय में सभी आवश्यक अभिलेख और आधिकारिक कागजात पूरी तरह एकत्र नहीं हो सके हैं, इसलिए निष्पक्ष सुनवाई और समुचित जवाब दाखिल करने के उद्देश्य से लोकसभा सचिवालय से चार सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया है।
संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं के अनुसार, राजनीतिक दल बदलने वाले सांसदों के खिलाफ मूल पार्टी द्वारा दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत सदस्यता समाप्त करने की याचिका दायर की जाती है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर इसी याचिका के आधार पर सचिवालय ने संबंधित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। अब अतिरिक्त समय की यह मांग स्वीकार होने पर सांसदों को अपने बचाव के तर्क मजबूत करने का अवसर मिलेगा, जबकि इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम रुख पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

