दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों के साथ हुए बड़े समझौते; रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दी अहम जानकारी
नई दिल्ली: भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमता अब केवल घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में तेजी से उभर रहा है। इसी क्रम में भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली भारत की रक्षा निर्यात सफलता का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर सामने आई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि ब्रह्मोस का कुल निर्यात आंकड़ा जल्द ही 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5,000 करोड़ रुपये से अधिक) को पार करने जा रहा है।
रणनीतिक मिसाइल प्रणाली की बिक्री को लेकर भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन प्रमुख मित्र देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते और आपूर्ति करार किए हैं। रक्षा सचिव ने विस्तार से बताया कि फिलीपींस को लगभग 330 मिलियन डॉलर मूल्य की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति पहले ही सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है, जो भारत के रक्षा इतिहास का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मिसाइल निर्यात सौदा था।
फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ भी इस मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते आगे बढ़ चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वियतनाम के लिए शुरुआती चरण का निर्यात करार करीब 100 मिलियन डॉलर और इंडोनेशिया के साथ संभावित रक्षा सौदा लगभग 200 मिलियन डॉलर का रहने का अनुमान है। इन सभी सौदों के औपचारिक क्रियान्वयन के साथ ही ब्रह्मोस का कुल अंतरराष्ट्रीय निर्यात 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच जाएगा।
रक्षा सचिव ने इस उपलब्धि को भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मील का पत्थर करार दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ब्रह्मोस की बढ़ती मांग न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और औद्योगिक आधार को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

