मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार शाम को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिससे राज्य की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
जातीय हिंसा को लेकर जनता से मांगी माफी
एन. बीरेन सिंह ने पिछले साल के अंत में मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर जनता से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था, “यह पूरा साल बेहद खराब रहा। मैं राज्य के लोगों से 3 मई 2023 से लेकर आज तक जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए माफी मांगता हूं। कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, कई लोगों ने अपना घर छोड़ दिया। मुझे इसका गहरा दुख है।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले तीन-चार महीनों में राज्य में शांति की स्थिति देखकर उन्हें उम्मीद है कि 2025 में राज्य में सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी।
इस्तीफे में क्या कहा एन. बीरेन सिंह ने?
राज्यपाल को सौंपे गए अपने इस्तीफे में एन. बीरेन सिंह ने लिखा:
“मैं नोंगथोम्बम बीरेन सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं। मणिपुर के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। मैं केंद्र सरकार का अत्यंत आभारी हूं, जिन्होंने समय पर कार्यवाही, हस्तक्षेप, विकास कार्य और विभिन्न परियोजनाओं को लागू किया, ताकि मणिपुर के हर एक नागरिक के हित की रक्षा की जा सके। मेरी केंद्र सरकार से ईमानदार अपील है कि वे इसी तरह काम जारी रखें।”
साथ ही उन्होंने अपने इस्तीफे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी उजागर किया:
- मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा जाना चाहिए, जिसका हजारों वर्षों का समृद्ध और सभ्य इतिहास रहा है।
- सीमा पर घुसपैठ रोकी जानी चाहिए और अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की नीति बनाई जाए।
- नशे और नशे के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहनी चाहिए।
- एमएफआर (Manipur Free Residence) की कड़ी और सुरक्षित व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें बायोमेट्रिक जांच सख्ती से की जाए।
- सीमा पर समयबद्ध और तेजी से सुरक्षा उपायों को जारी रखना चाहिए।
हिंसा के चलते भारी दबाव में थे बीरेन सिंह
मणिपुर में पिछले साल मई 2023 से जातीय हिंसा चल रही है, जिसमें अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। राज्य में बार-बार हिंसा भड़कने से मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर जबरदस्त दबाव था।
नवंबर में मणिपुर के जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके तीन बच्चों की हत्या के बाद भी राज्य में अशांति बढ़ गई थी। हिंसा के लगातार बढ़ते मामलों के कारण मुख्यमंत्री पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया था। इसके अलावा, एनडीए की सहयोगी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी मणिपुर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी।
कैसे शुरू हुई मणिपुर में हिंसा?
मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हिंसा 3 मई 2023 को उस समय शुरू हुई थी, जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने पर विचार करे।
इसके खिलाफ आदिवासी छात्रों संघ (ATSUM) ने एक रैली आयोजित की, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। हालात इतने बिगड़ गए कि केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।
क्या होगा आगे?
एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद अब मणिपुर में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और भाजपा हाईकमान राज्य में शांति बहाल करने के लिए क्या कदम उठाते हैं और अगला मुख्यमंत्री कौन बनता है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के साथ, मणिपुर के लोग आशा कर रहे हैं कि राज्य में स्थायी शांति स्थापित हो और हिंसा का दौर समाप्त हो।

