केरल के प्रगतिशील सामाजिक ताने-बाने पर उठाए सवाल, मुस्लिम समुदाय के भीतर गंभीर आत्ममंथन का किया आह्वान
तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर विश्व बैंक के एक अध्ययन का हवाला देते हुए सामने आई रिपोर्ट को “परेशान करने वाला” बताया है। इस अध्ययन में सामने आया है कि सऊदी अरब से केरल लौटने वाले कुछ प्रवासियों में महिलाओं के खिलाफ शारीरिक और लैंगिक हिंसा को लेकर अपेक्षाकृत अधिक रूढ़िवादी और अतिवादी दृष्टिकोण देखने को मिला है।
थरूर ने कहा कि यह निष्कर्ष विदेशों में अपनाए गए रूढ़िवादी सामाजिक दृष्टिकोण के स्थानीय समाज पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
केरल की प्रगतिशील पहचान और सह-अस्तित्व पर जोर थरूर ने रेखांकित किया कि केरल ऐतिहासिक रूप से एक उदार और प्रगतिशील सांस्कृतिक परंपरा का केंद्र रहा है, जो राज्य के सांप्रदायिक सद्भाव और सह-अस्तित्व के पूरी तरह अनुकूल है। उन्होंने राज्य में मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा मिलने के उत्कृष्ट रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। उन्होंने चिंता जताई कि विदेशों से ऐसे प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण का आना केरल के मूल सामाजिक ताने-बाने से मेल नहीं खाता।
विश्व बैंक के अध्ययन में क्या आया सामने विश्व बैंक के तहत किए गए इस शोध में आर्थिक पहलुओं से आगे बढ़कर प्रवासन के सामाजिक प्रभावों की पड़ताल की गई थी। अध्ययन के अनुसार, सऊदी अरब से लौटने वाले लोगों में बिना प्रवासन अनुभव वाले लोगों की तुलना में लिंग आधारित हिंसा पर अधिक रूढ़िवादी रुख देखा गया, जबकि अन्य खाड़ी देशों के मामले में यह पैटर्न अलग था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सह-संबंध दर्शाता है। थरूर के इस बयान ने प्रवासन के सांस्कृतिक प्रभावों पर नई चर्चा छेड़ दी है।

