कृषि और पशुपालन से चलती है घर की आजीविका, दो बुज़ुर्ग मुखिया लेते हैं रोज़ाना के सभी बड़े फैसले
आज के दौर में जहां एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में एक ऐसा परिवार है जो भारतीय परंपरा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। ज़िले के कुरलापल्ली गांव में छह पीढ़ियों का एक विशाल संयुक्त परिवार एक साथ रहता है, जिसमें कुल 83 सदस्य शामिल हैं।
कल्याणदुर्ग से सात किलोमीटर दूर बसे कुरलापल्ली गांव में प्रवेश करते ही आमने-सामने बने दो-तीन मंज़िला बड़े मकान इस परिवार की मौजूदगी बयां करते हैं। बढ़ते कुनबे की वजह से अब ये तीन मकान भी कम पड़ने लगे हैं, जिसके चलते परिवार फिलहाल चौथे मकान का निर्माण करवा रहा है।
खान-पान का विशाल पैमाना इतने बड़े परिवार का खान-पान भी किसी बड़े आयोजन से कम नहीं होता। घर में एक दिन के भोजन के लिए 50 किलो चावल की पूरी बोरी की खपत होती है। रविवार को विशेष मांसाहारी भोजन के लिए पूरे एक मेमने की आवश्यकता होती है, वहीं शाम के समय अगर पकौड़े बनाने हों, तो करीब 15 किलो बेसन इस्तेमाल हो जाता है।
खेती और पशुपालन मुख्य आजीविका इस परिवार की मुख्य आजीविका पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। घर के सभी सदस्य मिलकर खेतों में फसल उगाते हैं। इसके अलावा, परिवार के लोग दुधारू गायों और भेड़ों का पालन-पोषण भी मिलकर करते हैं।
अनुशासन और परंपरा का मेल 83 सदस्यों वाले इस कुनबे की कमान परिवार के दो बुज़ुर्गों—हनुमंथा रायडू और मुत्यालप्पा के हाथों में है। सुबह दूध दुहने से लेकर खेती, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों का हर फैसला यही दोनों मुखिया करते हैं। परिवार का हर सदस्य इनके निर्देशों का सम्मान करता है, जो इस विशाल परिवार की एकजुटता का मुख्य आधार है।

