पूर्व जजों और रिटायर्ड डीजीपी के पैनल को जिम्मा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों को राहत के संकेत
नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाइयों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मंशा भी जताई है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नीट आंदोलन से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए।
तीन सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग पैनल की रूपरेखा
पीठ के संकेतों के अनुसार, इस विशेष समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और डीजीपी रैंक के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। कानूनी मामलों की वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पैनल को फैक्ट-फाइंडिंग (तथ्य जुटाने) का जिम्मा सौंपा जाएगा और यह समय-समय पर अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
पीड़ितों को मिलेगा पक्ष रखने का मौका
बेंच ने कहा कि कमेटी को सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुविधाएं दी जाएंगी ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। अदालत ने भरोसा जताया कि यह कमेटी अपने पास आने वाले हर पीड़ित को त्वरित सुनवाई का अवसर देगी और समिति की सिफारिशों के आधार पर अदालत जरूरी कानूनी निर्देश जारी करेगी।
सीजेपी ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, प्रदर्शनों में शामिल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आरोप लगाया है कि आंदोलनकारी छात्रों पर एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई के मामले में सरकार की मंशा बिल्कुल ठीक नहीं है।

