नई दिल्ली: भारत सरकार ने चांदी (Silver) के आयात को लेकर अपनी नीति में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब चांदी के आयात को ‘फ्री’ (मुक्त) श्रेणी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) श्रेणी में डाल दिया गया है। इस फैसले के बाद अब भारत में चांदी मंगाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
क्या बदलेगा अब? इस नीतिगत बदलाव से पहले भारत में चांदी आयात करने के लिए व्यापारियों को केवल निर्धारित कस्टम ड्यूटी (आयात शुल्क) देनी होती थी। लेकिन अब:
- चांदी आयात करने के लिए व्यापारियों को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के पास लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा।
- डीजीएफटी से आधिकारिक लाइसेंस मिलने के बाद ही चांदी को भारत में आयात करने की अनुमति दी जाएगी।
सोने और चांदी के नियमों में अंतर इस नए संशोधन की सबसे खास बात यह है कि सरकार ने यह सख्त शर्त केवल चांदी पर लागू की है। सोने (Gold) के आयात नियमों में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि सोना आर्थिक मूल्य के मामले में चांदी की तुलना में कहीं अधिक महंगा है। सरकार के इस कदम के पीछे के कूटनीतिक और आर्थिक कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि: विदेशी मुद्रा बचाने की कवायद यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए आर्थिक कदमों की अगली कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की विदेशी मुद्रा को बचाने की अपील के बाद, 12 मई को सरकार ने सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया था।
इस भारी शुल्क वृद्धि का स्पष्ट मकसद यह था कि कीमती धातुएं महंगी होने से बाजार में इनकी मांग और खरीदारी कम होगी। इसके परिणामस्वरूप भारत को इनके आयात के लिए कम विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) खर्च करनी पड़ेगी, जिससे देश के चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अब चांदी पर लाइसेंस की शर्त लगाना इसी नियंत्रण को और मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

