1 अक्तूबर की समय सीमा तय; सब्सिडी रुकने का खतरा, फर्जी और डुप्लीकेट कनेक्शनों पर लगाम लगाने की तैयारी
मुंबई: महाराष्ट्र में घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वाले करीब 36 लाख उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन पर गहरा संकट मंडराने लगा है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत यदि इन उपभोक्ताओं ने तय समय सीमा के भीतर अपना अनिवार्य बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन पूरा नहीं कराया, तो आगामी 1 अक्तूबर के बाद उनके एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक किए जा सकते हैं। कनेक्शन ब्लॉक होने के साथ ही उपभोक्ताओं को मिलने वाली 210 रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय सब्सिडी भी रोकी जा सकती है।
राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर तक महाराष्ट्र में 85 प्रतिशत से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता अपनी अनिवार्य बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया सफलता पूर्वक पूरी करा चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद राज्य में अभी भी लगभग 36 लाख ऐसे उपभोक्ता शेष हैं, जिन्होंने इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 1 अक्तूबर की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।
प्रशासन के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी कवायद का मुख्य उद्देश्य एलपीजी सब्सिडी का वित्तीय लाभ केवल वास्तविक और पात्र जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचाना तथा प्रणाली में मौजूद फर्जी या डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों को पूरी तरह समाप्त करना है। वर्तमान आंकड़ों के आधार पर बिना सब्सिडी वाले एक घरेलू एलपीजी सिलिंडर की वास्तविक लागत लगभग 1,500 रुपये बैठती है, जबकि केंद्रीय सब्सिडी के बाद पात्र लाभार्थी को 14.2 किलोग्राम का सिलिंडर करीब 731 रुपये की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
महाराष्ट्र में वर्तमान में 2.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक परिवार नियमित रूप से 210 रुपये की सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था पूरी तरह लागू होने से फर्जी लाभार्थियों की पहचान होगी, एक ही पते पर चल रहे एकाधिक कनेक्शन बंद होंगे और सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग व कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

