नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का कड़ा खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि सरकार विदेश यात्रा पर नया टैक्स, सेस या सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री ने इन खबरों को भ्रामक और सच्चाई से परे बताया है।
प्रधानमंत्री का स्पष्टीकरण: ‘आम जन का जीवन आसान बनाना प्राथमिकता’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी योजना को लेकर सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
- खबरों को नकारा: पीएम ने लिखा कि इस तरह की खबरों में एक भी प्रतिशत सच्चाई नहीं है।
- प्रतिबंध से इनकार: उन्होंने साफ कहा कि विदेश यात्रा पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क लगाने का सवाल ही नहीं उठता।
- सरकार का विजन: प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि सरकार का पूरा ध्यान ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ के माध्यम से नागरिकों के जीवन को सरल बनाने पर केंद्रित है।
भ्रामक रिपोर्ट्स में क्या था दावा?
हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पड़ रहे वित्तीय दबाव को कम करने के लिए सरकार विदेश यात्राओं पर अस्थायी सरचार्ज लगा सकती है। दावा किया गया था कि यह कदम आयात खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के लिए उठाया जा सकता है, जिसे अब प्रधानमंत्री ने पूरी तरह निराधार करार दिया है।
पीएम मोदी की पूर्व अपील: ‘देशहित में छोटे बदलाव जरूरी’
हालांकि प्रधानमंत्री ने टैक्स की खबरों को खारिज किया है, लेकिन 10 मई को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों से स्वैच्छिक रूप से कुछ आर्थिक अनुशासन बरतने की अपील जरूर की थी। उनके प्रमुख सुझाव निम्नलिखित थे:
विदेशी दौरे: उन्होंने नागरिकों से अपील की थी कि वर्तमान आर्थिक और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए यदि संभव हो, तो छुट्टियों या शादियों के लिए विदेश यात्रा को कुछ समय के लिए टालना देशहित में एक सकारात्मक कदम होगा।
सोने की खरीद: उन्होंने आग्रह किया कि देश की विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कम से कम एक साल तक सोने की खरीद और दान से बचें।
ईंधन की बचत: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए अनावश्यक वाहन उपयोग न करें। सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो) का उपयोग करें, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दें।
खाद्य तेल और उर्वरक: खाद्य तेल की खपत में थोड़ी कमी करने और कृषि में रासायनिक उर्वरकों के बजाय प्राकृतिक खेती अपनाने का सुझाव दिया।

