बहरोड़ में बनेगा ड्रोन ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, एआई और डीपफेक खतरों से निपटने के लिए जवानों को विशेष ट्रेनिंग
नई दिल्ली: देश के अति-संवेदनशील और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिकतम तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस’ (15 सितंबर) के अवसर पर सीआईएसएफ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी उभरती हुई आधुनिक और तकनीक-आधारित सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बल की तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
बहरोड़ ट्रेनिंग सेंटर में बनेगा ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत राजस्थान के बहरोड़ स्थित सीआईएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में ड्रोन तकनीक के लिए एक समर्पित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जाएगी। यह अत्याधुनिक केंद्र सीआईएसएफ के जवानों और अधिकारियों को ड्रोन प्रणालियों के संचालन, हवाई निगरानी, टोही गतिविधियों और संभावित एंटी-ड्रोन सुरक्षा उपायों के संबंध में विशेष एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे महत्वपूर्ण ठिकानों की निगरानी प्रणाली पहले से अधिक चाक-चौबंद होगी।
परमाणु प्रतिष्ठानों की साइबर सुरक्षा और डीपफेक का मुकाबला समझौते का दूसरा प्रमुख लक्ष्य देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र (न्यूक्लियर सेक्टर) और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को डिजिटल खतरों से अभेद्य बनाना है। इसके तहत जवानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक पहचान, क्लाउड कंप्यूटिंग और संवेदनशील ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) की सुरक्षा जैसे गंभीर तकनीकी विषयों पर आईआईटी कानपुर के विषय विशेषज्ञों द्वारा उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस विशेष पहल से साइबर हमलों के बदलते तौर-तरीकों का समय रहते मुकाबला करने में बल को सीधी मदद मिलेगी।

