छह महीने के शिशु और तीन साल के बेटे के साथ सीसीएस में बैठी रहीं जल्ली रेखा; पत्रकार संगठनों ने बताया उत्पीड़न
हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक महिला पत्रकार से साइबर अपराध से जुड़े मामले में करीब सात घंटे तक लंबी पूछताछ किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रभावित पत्रकार की पहचान जल्ली रेखा के रूप में हुई है, जिन्हें बुधवार को पुलिस ने पूछताछ के लिए तलब किया था। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं, पत्रकार के सहयोगियों और नागरिक संगठनों ने पुलिस की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सत्ता का दुरुपयोग और मानसिक उत्पीड़न करार दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार जल्ली रेखा को एक कथित साइबर अपराध की जांच के सिलसिले में बुधवार को हैदराबाद पुलिस की अपराध जांच शाखा यानी सेंट्रल क्राइम स्टेशन (सीसीएस) में बुलाया गया था। बीआरएस नेताओं और पत्रकार के परिचितों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें लगभग सात घंटे तक लगातार थाने में रोके रखा और पूछताछ की। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका छह महीने का दुधमुंहा शिशु और तीन साल का मासूम बेटा भी उनके साथ पुलिस स्टेशन में ही मौजूद रहे।
मासूम बच्चों की मौजूदगी में एक महिला पत्रकार को घंटों थाने में बैठाए रखने के इस रवैये पर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश फैल गया है। बीआरएस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने और असहमति को कुचलने के लिए अमानवीय तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान कानून और मानवीय गरिमा को ताक पर रखकर एक दुधमुंहे बच्चे की मां को मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया।
विभिन्न पत्रकार संगठनों ने भी इस घटनाक्रम की कड़ी भर्त्सना करते हुए पुलिस के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। संगठनों का कहना है कि यदि किसी मामले में जांच या पूछताछ जरूरी भी थी, तो पुलिस को महिलाओं और छोटे बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए था। इस विवाद के सामने आने के बाद हैदराबाद पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों के हनन को लेकर बहस तेज हो गई है।

