बेकसूरों को फंसाने के मामलों पर शीर्ष अदालत गंभीर, अगले हफ्ते होगी सुनवाई; केंद्र व राज्यों से पहले ही मांगा है जवाब
नई दिल्ली: मनगढ़ंत सबूतों, झूठी शिकायतों और दुर्भावनापूर्ण फर्जी मुकदमों के जरिए बेकसूर नागरिकों को प्रताड़ित करने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश की शीर्ष अदालत अगले सप्ताह एक ऐसी महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है, जिसमें देश भर के सभी पुलिस थानों, कचहरियों और सार्वजनिक सरकारी दफ्तरों में प्रमुखता से चेतावनी डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इन सूचना पट्टों पर स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के साथ यह दर्ज होगा कि झूठी शिकायत दर्ज कराने या बेबुनियाद केस बनाने पर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ किस प्रकार की दंडात्मक कानूनी कार्रवाई और जेल की सजा हो सकती है।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष इस जनहित याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की तरफ से पेश हुए वकील अश्विनी दुबे ने पीठ से मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई का आग्रह किया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका को अगले हफ्ते औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति प्रदान की।
गौरतलब है कि बेकसूर लोगों को झूठे मामलों में फंसाए जाने की प्रवृत्ति को रोकने के उद्देश्य से दायर इस व्यापक याचिका पर शीर्ष अदालत पहले ही केंद्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर उनका आधिकारिक जवाब मांग चुकी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि थानों और अदालतों में कानूनी परिणामों से संबंधित चेतावनी बोर्ड प्रदर्शित होने से न केवल फर्जी मामले दर्ज कराने की प्रवृत्ति में भारी कमी आएगी, बल्कि निर्दोष नागरिकों को बेवजह कानूनी प्रताड़ना और सामाजिक अपमान झेलने से भी प्रभावी सुरक्षा मिल सकेगी।

