वीडियो बनाने, फोटो खींचने और लाइवस्ट्रीमिंग पर रोक को बताया असंवैधानिक; बुनियादी सुविधाओं के दस्तावेजीकरण की मांग
नई दिल्ली: राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के प्रवेश तथा परिसर के भीतर फोटो खींचने, वीडियो बनाने और लाइवस्ट्रीमिंग पर लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मंगलवार को इस याचिका पर त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया।
याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से वरिष्ठ वकील नरेंद्र मिश्रा ने पीठ को बताया कि राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए इन प्रतिबंधात्मक आदेशों के कारण स्कूलों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को उजागर करने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) और यहां तक कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई का खतरा पैदा हो गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने विचार करने का भरोसा दिया।
राजस्थान और यूपी के जिला स्तरीय परिपत्रों को चुनौती याचिका में विशेष रूप से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी उस परिपत्र को चुनौती दी गई है, जिसमें स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग या प्रवेश से पहले प्रधानाचार्य से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी समान प्रतिबंधात्मक आदेशों को भी रद्द करने की मांग की गई है।
‘बच्चों की निजता के नाम पर बुनियादी ढांचा छिपाना गलत’ याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि ये आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए), 19(1)(जी) और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में स्पष्ट किया गया कि बच्चों की सुरक्षा और निजता की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है, लेकिन इसकी आड़ में स्कूल की कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल, बिजली और मिड-डे मील जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का दस्तावेजीकरण और सार्वजनिक रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत से ऐसे प्रतिबंधों को आनुपातिकता और औचित्य की कसौटी पर परखने की अपील की गई है।

