नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें पाकिस्तान के साथ ‘पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट’ (जनता के बीच संपर्क) बढ़ाने की बात कही गई थी।
आम आदमी की समस्याएं एक समान: जनरल नरवणे
एक कार्यक्रम के दौरान पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि राजनीति से इतर दोनों देशों के नागरिकों की बुनियादी जरूरतें एक जैसी हैं।
- समान चुनौतियां: उन्होंने कहा, “सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम लोगों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान की समस्याएं एक समान हैं। आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता।”
- दोस्ती का आधार: जनरल नरवणे ने जोर दिया कि जब दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और दोस्ती बढ़ेगी, तभी द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
- दुश्मनी का भ्रम: उन्होंने कहा कि हमारे नागरिकों को यह समझना चाहिए कि सीमा पार रहने वाला हर व्यक्ति “कट्टर दुश्मन” नहीं है।
क्या था दत्तात्रेय होसबाले का बयान?
आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले ने हाल ही में कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का भरोसा खो दिया है। ऐसे में:
- गतिरोध तोड़ना: गतिरोध खत्म करने के लिए आम नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाना सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है।
- नागरिक समाज की भूमिका: अब समय आ गया है कि दोनों देशों का नागरिक समाज (Civil Society) बातचीत का नेतृत्व करे।
- निरंतर संवाद: उन्होंने सुझाव दिया कि बातचीत के रास्ते कभी पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए।
‘ट्रैक टू’ कूटनीति और सैन्य शक्ति का संतुलन
जनरल नरवणे ने संबंधों को सुधारने के लिए ‘ट्रैक टू कूटनीति’ (Track Two Diplomacy) और खेल आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डाला। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति की पहल का अर्थ कमजोरी नहीं है।
“विवादों का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते। भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन यदि सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ी, तो बल प्रयोग करने में हम संकोच नहीं करेंगे।” — जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे

