अमलापुरम: आंध्र प्रदेश के गोदावरी क्षेत्र से रोजगार की तलाश में खाड़ी देशों (Gulf Countries) में जाने वाले कामगारों के उत्पीड़न और धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें भारतीय श्रमिक खुद को खतरे में बताकर मदद की गुहार लगा रहे हैं। इसी बीच, विदेश में कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों की सुरक्षित वापसी और मदद के लिए डॉक्टर बीआर आंबेडकर कोनासीमा जिले में एक विशेष ‘प्रवासन केंद्र’ (Migration Centre) की स्थापना की गई है। जिला कलेक्टर को इस केंद्र का अध्यक्ष बनाया गया है, जो उत्पीड़न के आरोपों की गहन जांच करेगा।
कतर में शेख अम्मी के साथ क्या हुआ?
कोनासीमा जिले के द्राक्षारामम की निवासी शेख अम्मी दिसंबर 2025 में कडियाम क्षेत्र की सुल्ताना (बदला हुआ नाम) नामक महिला के माध्यम से घरेलू सहायिका और रसोइया के काम के लिए कतर गई थीं। अम्मी ने आपबीती सुनाते हुए बताया, “वहाँ मुझसे दिन-रात बहुत काम करवाया गया, लेकिन ठीक से खाना नहीं दिया जाता था। मिर्च के साथ थोड़े से चावल खाने को मिलते थे, जिससे मेरे पेट में भयंकर दर्द रहने लगा। दो महीने में ही मेरी हालत इतनी गंभीर हो गई कि मुझे दौरे पड़ने लगे और अस्पताल ले जाना पड़ा।”
अम्मी के अनुसार, जब डॉक्टर ने उन्हें काम न करने की सलाह दी, तो मकान मालिकों ने उनसे दो लाख रुपये की मांग शुरू कर दी और पैसे न मिलने तक बंधक बना लिया। द्राक्षारामम में रहने वाले उनके बेटे ने अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप से उनकी वापसी संभव हो सकी। हालांकि, उन्हें कतर भेजने वाली सुल्ताना ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह कोई प्रोफेशनल एजेंट नहीं हैं, बल्कि दुबई में परिचितों के जरिए मदद करती हैं। बीबीसी भी इन व्यक्तिगत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें – भारतीय अर्थव्यवस्था और पेट्रोल क्राइसिस: चुनौतियाँ, प्रभाव और आगे की राह – रवि निगम
गोदावरी जिले से खाड़ी देशों तक पलायन का सच
आंध्र प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा और एलुरु जिलों से हर साल हजारों लोग पलायन करते हैं। शिक्षित युवा जहाँ वाइट कॉलर (कार्यालय) नौकरियों के लिए जाते हैं, वहीं कम पढ़े-लिखे लोग निर्माण उद्योग, राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, वेल्डर और हाउसकीपिंग जैसे ब्लू कॉलर (शारीरिक श्रम) वाले कामों के लिए खाड़ी देशों का रुख करते हैं।\
अज्ञात एजेंटों का जाल और सरकारी कदम
कोनासीमा जिले के अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में अज्ञात और अवैध एजेंटों के जरिए धोखाधड़ी तथा विदेशी नियोक्ताओं द्वारा उत्पीड़न की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इसी वजह से देश लौटने वाले कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है। राहत की बात यह है कि हाल ही में जिला प्रशासन की सक्रिय मदद और कानूनी कार्रवाई के चलते कोनासीमा जिले के 80 से अधिक पीड़ित श्रमिक सुरक्षित अपने गृहनगर लौट आए हैं। प्रशासन ने अब लोगों से केवल पंजीकृत और वैध माध्यमों से ही विदेश जाने की अपील की है।

