महाराष्ट्र की सियासत में उस समय गर्माहट बढ़ गई जब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने स्पष्ट किया कि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सहयोगी एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के प्रति कोई नाराजगी नहीं है, भले ही उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया।
पवार हमारे पिता तुल्य- संजय राउत:
संजय राउत ने कहा, “पवार साहब के प्रति कोई नाराजगी नहीं है। उनका सम्मान करना जरूरी है और पुरस्कार न देना उस व्यक्ति का अपमान होगा जिसके नाम पर यह पुरस्कार दिया जाता है। पवार साहब हमारे लिए पिता समान हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र आते हैं और शरद पवार के खिलाफ बयान देते हैं, तब पवार के समर्थक कुछ नहीं कहते।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई:
शरद पवार ने 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
आदित्य ठाकरे का तीखा हमला:
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए उन्हें महाराष्ट्र के औद्योगिकीकरण को नुकसान पहुंचाने और शिवसेना में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। ठाकरे ने कहा, “जो महाराष्ट्र द्रोही है, वह देश द्रोही भी होता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके सिद्धांत उन्हें एकनाथ शिंदे जैसे व्यक्ति को सम्मानित करने की अनुमति नहीं देते।
राजनीतिक गर्माहट की वजह:
98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान शरद पवार और एकनाथ शिंदे के मंच साझा करने से राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हुआ। एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार दिया गया, जिसमें 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह और पारंपरिक शिंदेशाही पगड़ी शामिल थी।
यह सियासी घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है, जिससे आगामी दिनों में राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

