मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग के कामकाज को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। शुक्रवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब राजस्व विभाग की सभी अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) कार्यवाहियों में मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
सुनवाई और आदेश अब मराठी में
नई व्यवस्था के तहत न केवल मामलों की सुनवाई मराठी में होगी, बल्कि अधिकारियों द्वारा पारित किए जाने वाले सभी अंतरिम और अंतिम आदेश भी अनिवार्य रूप से मराठी भाषा में ही लिखे जाएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझना आसान बनाना है।
नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के मुख्य बिंदु
राजस्व मंत्री चंद्रकांत बावनकुले ने इस संबंध में 29 पन्नों का विस्तृत सरकारी प्रस्ताव और एसओपी (SOP) पेश किया है। इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- सुनवाई के लिए निश्चित दिन: सभी राजस्व अधिकारियों के लिए सप्ताह में कम से कम दो दिन सुनवाई करना अनिवार्य होगा। इसके लिए मंगलवार और शुक्रवार के दिन निर्धारित किए गए हैं।
- समय सीमा: विवादों के त्वरित निपटारे के लिए, सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकतम आठ सप्ताह के भीतर ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जारी करना होगा।
- स्थगन पर लगाम: किसी भी मामले में तारीख (स्थगन) केवल एक बार और ठोस कारण होने पर ही दी जा सकेगी। बिना दोनों पक्षों की दलीलें सुने कोई आदेश पारित नहीं होगा।
- डिजिटल पारदर्शिता: सभी आदेशों को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित करना और सिस्टम पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
नागरिक-केंद्रित प्रशासन की ओर कदम
राजस्व मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उठाया गया यह कदम राजस्व प्रशासन को अधिक गतिशील और जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगा।
विशेष श्रेणियों के लिए गाइडलाइन: सरकार ने मामूली खनिज (Minor Minerals), खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते से संबंधित याचिकाओं और लिपिकीय त्रुटियों (Clerical Errors) को सुधारने के लिए अलग से विशिष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। यह पूरी प्रक्रिया महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत संचालित की जाएगी।

