चेन्नई: तमिलनाडु में तीन भाषा नीति को लेकर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी अरुण कुमार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं और हर राज्य को अपनी भाषा को बढ़ावा देना चाहिए।
आरएसएस नेता का बयान
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी अरुण कुमार ने कहा,
“भारत विविध भाषाओं का देश है और सभी भाषाएं समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हर राज्य को अपनी भाषा में सरकारी कामकाज करने का अधिकार है। भाषा के मुद्दे पर विवाद खड़ा करना पूरी तरह गलत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी भाषा को जबरदस्ती थोपना उचित नहीं है और देश में सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
तीन भाषा नीति को लेकर तमिलनाडु में विवाद
तमिलनाडु में केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन भाषा नीति का लगातार विरोध किया जा रहा है। राज्य सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह सिर्फ दो भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का समर्थन करती है और हिंदी को अनिवार्य रूप से लागू करने के खिलाफ है।
तमिलनाडु सरकार का रुख
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा था कि तमिलनाडु में तीन भाषा नीति किसी भी सूरत में लागू नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार अपने राज्य की भाषा नीति को बनाए रखने के लिए कोई भी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।
क्या है तीन भाषा नीति?
भारत में तीन भाषा नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं (अंग्रेजी, हिंदी और एक क्षेत्रीय भाषा) सीखनी होती हैं। लेकिन तमिलनाडु सरकार हिंदी को अनिवार्य करने के खिलाफ है और केवल तमिल व अंग्रेजी को ही अपनाने के पक्ष में है।
भाषा के मुद्दे पर राजनीति तेज
इस विवाद के कारण डीएमके और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ गया है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके का कहना है कि **हिंदी को जबरदस्ती थोपना राज्य की सांस्कृतिक पहचान पर हमला

