मराठी न बोलने वालों को राज्य छोड़ने की दी चेतावनी, मारपीट की घटना के बाद इलाके में बढ़ा तनाव
मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के नियम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुंबई के कांदिवली इलाके में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने कई स्थानों पर चेतावनी भरे बोर्ड लगाए हैं। पार्टी ने साफ किया है कि यदि भाषा के नाम पर यात्रियों को परेशान किया गया या शहरवासियों को बंधक बनाने की कोशिश की गई, तो मनसे चुप नहीं बैठेगी।
मनसे के चारकोप विधानसभा क्षेत्र के नेता दिनेश साल्वी ने राज्य सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि जिन ऑटो चालकों को मराठी सीखने या बोलने में आपत्ति है, वे महाराष्ट्र छोड़कर अपने-अपने राज्यों में वापस लौट सकते हैं।
प्रदर्शन में शामिल न होने पर मारपीट से उपजा विवाद यह पूरा विवाद कांदिवली के एमजी रोड पर सोमवार को हुए हंगामे के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि चार ऑटो चालकों ने एक स्थानीय मराठी भाषी चालक के साथ मारपीट की, क्योंकि उसने मराठी अनिवार्यता के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने और ऑटो संचालन बंद करने से इनकार कर दिया था। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और उत्तर भारतीय चालकों के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
1989 से लागू है नियम, परिवहन विभाग ने तेज की जांच महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यव्यापी जांच अभियान शुरू किया है, जिसके तहत गैर-मराठी चालकों के व्यावहारिक मराठी ज्ञान की पड़ताल की जा रही है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि मोटर वाहन नियमों के तहत 1989 से ही कामकाजी मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य है, जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। वहीं, ‘हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ के जरिए अब तक 1.65 लाख से अधिक गैर-मराठी चालकों ने कामकाजी मराठी सीखने के लिए पंजीकरण कराया है।

