12,000 से अधिक जवान तैनात, एमएमडीआर एक्ट के तहत करोड़ों रुपये का अवैध कोयला जब्त
धनबाद: देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने ‘जीरो कोल लीकेज’ का कड़ा संकल्प लिया है। इस मिशन को धरातल पर प्रभावी बनाने और विषम परिस्थितियों में डटे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 16 से 18 सितंबर तक झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों (ईसीएल और बीसीसीएल) का व्यापक और रणनीतिक दौरा किया। उनका यह तीन दिवसीय दौरा केवल नियमित सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अवैध तत्वों को सीधा संदेश था कि राष्ट्रीय प्राकृतिक संपदा की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
10 यूनिट्स में तैनात हैं 12,000 से अधिक जांबाज जवान झारखंड और पश्चिम बंगाल के भौगोलिक रूप से दुर्गम, संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण खनन इलाकों में सीआईएसएफ के 12,000 से अधिक जवान 10 विशेष यूनिट्स में तैनात हैं। ये बल चौबीसों घंटे कोयला खदानों, रेलवे साइडिंग और ढुलाई मार्गों पर कड़ी निगरानी रखते हैं। महानिदेशक ने अपने दौरे के दौरान अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से सीधा संवाद किया और तकनीकी निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए।
एमएमडीआर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई, करोड़ों का कोयला बरामद कोयला तस्करों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ बल ने हाल ही में खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी एमएमडीआर एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत व्यापक अभियान चलाया है। इस सघन कार्रवाई के दौरान हजारों टन अवैध कोयला जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। सीआईएसएफ नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि खदान क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी, नाइट विजन डिवाइस और आधुनिक चेकपोस्ट के जरिए सुरक्षा घेरा इतना मजबूत किया जाएगा कि किसी भी स्तर पर कोयले का अवैध रिसाव पूरी तरह समाप्त हो सके।

