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Friday, June 26, 2026

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सीआरपीएफ के ग्राउंड कमांडरों को 15 साल बाद मिली पहली विधिक पदोन्नति: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीजी ने जारी किया फरमान, 263 अफसर बनेंगे डिप्टी कमांडेंट

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे ग्राउंड कमांडरों के लिए एक ऐतिहासिक और विधिक रूप से महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने बृहस्पतिवार (25 जून 2026) को बल के लगभग 263 सहायक कमांडेंट (Assistant Commandant – AC) को डिप्टी कमांडेंट (Deputy Commandant – DC) के पद पर पदोन्नत करने का आधिकारिक व विधिक आदेश जारी कर दिया है।

यह विधिक कामयाबी इन जांबाज अधिकारियों को सेवा के 15वें वर्ष में जाकर मिली है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा दो माह पूर्व विभागीय पदोन्नति कमेटी (DPC) पर लगा स्टे हटाने और 16 अप्रैल 2026 को दिए गए ऐतिहासिक विधिक आदेश (सिविल अपील संख्या: 4585-4586/2025) के अनुपालन में महानिदेशक (DG) सीआरपीएफ ने इन पदोन्नतियों को विधिक मंजूरी दी है।

पदोन्नति का विधिक व वित्तीय ढांचा

यह पदोन्नति सीधे तौर पर अधिकारियों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों में वृद्धि करेगी:

  • पे-मैट्रिक्स और वेतनमान: पदोन्नत हुए सभी अधिकारियों को अब पे-मैट्रिक्स लेवल-11 के तहत वित्तीय लाभ मिलेगा, जिसके तहत उनका मूल वेतनमान ₹67,700 से ₹2,08,700 के विधिक स्लैब में निर्धारित होगा।
  • प्रभावी तिथि: यह पदोन्नति वर्ष 2024 की रिक्तियों के विरुद्ध की गई है और यह अधिकारियों द्वारा नए पद का कार्यभार (Charge) संभालने की विधिक तारीख से पूरी तरह प्रभावी मानी जाएगी।
  • लाभान्वित होने वाले विधिक वर्ग: इस आदेश से सीआरपीएफ के 43वें बैच के सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी (DAGOs), विभागीय प्रवेश वाले राजपत्रित अधिकारी और सीधे नियुक्त अधीनस्थ अधिकारी/स्थानीय पदोन्नत अधिकारी विधिक रूप से लाभान्वित होंगे।

डीजी जीपी सिंह के प्रयासों से मिली विधिक सफलता

इस बहुप्रतीक्षित पदोन्नति प्रक्रिया को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने में सीआरपीएफ के महानिदेशक (DG) जीपी सिंह की प्रशासनिक और विधिक पैरवी का विशेष योगदान रहा है।

सैनिक सम्मेलन में दिया था विधिक आश्वासन
विभिन्न सैनिक सम्मेलनों और उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जब भी फील्ड में तैनात सहायक कमांडेंटों द्वारा पदोन्नति में हो रही विधिक देरी का मुद्दा उठाया गया, तब डीजी जीपी सिंह ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया था। गृह मंत्रालय (MHA) के समक्ष बल का पक्ष मजबूती से रखने और देश की सर्वोच्च अदालत में प्रभावी विधिक पैरवी सुनिश्चित करने के बाद, डीजी सिंह ने बल महानिदेशालय (दिल्ली एनसीआर) में स्वयं उपस्थित होकर अधिकारियों के कंधे पर डिप्टी कमांडेंट के विधिक स्टार/रैंक लगाए।

इससे पूर्व, अदालती आदेश के तुरंत बाद 17 अप्रैल 2026 को ही मुख्यालय ने सभी जोन, ग्रुप सेंटरों और बटालियनों को पत्र जारी कर पात्र अधिकारियों की मेडिकल रिपोर्ट अति-आवश्यक (Top Priority) आधार पर मंगवा ली थी, ताकि विधिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

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