मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब एक बहुत बड़ी विधिक व राजनीतिक बगावत में तब्दील हो चुकी है। मुंबई में रविवार (21 जून 2026) को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) के पूरी तरह सफल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए चुटकी ली और कहा कि “ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब रहा है और बॉडी बेहद स्वस्थ है।” उन्होंने ठाकरे को आत्मनिरीक्षण (Self-Introspection) करने की नसीहत भी दी।
मुख्यमंत्री शिंदे का तीखा हमला: “काम पूरा करना ही मेरी आदत है”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया:
- अधूरा नहीं छोड़ते काम: शिंदे ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि वे कभी भी कोई राजनीतिक ऑपरेशन अधूरा नहीं छोड़ते। जब भी वे कोई जिम्मेदारी अपने हाथों में लेते हैं, उसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेते हैं।
- ‘केमिकल लोचा’: उन्होंने उद्धव खेमे की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि वहाँ अजीब ‘केमिकल लोचा’ चल रहा है; वे पहले अपने ही सांसदों को अपशब्द कहते हैं और फिर उम्मीद करते हैं कि वे वापस लौट आएं। शिंदे ने दावा किया कि बहुत जल्द महाराष्ट्र की जनता को एक और बड़ी ‘ब्रेकिंग न्यूज’ मिलेगी।
दलबदल विरोधी कानून और 6 सांसदों का विधिक गणित
गौरतलब है कि 17 जून को शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की बैठक से कुल 9 में से 6 लोकसभा सांसद गायब रहे थे, जिसके बाद से ही उनके पाला बदलने की अटकलें तेज थीं।
- लापता सांसदों के नाम: संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल आष्टीकर और ओमराजे निंबालकर।
- विधिक सुरक्षा का फॉर्मूला: संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए मूल दल के दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ अलग होना अनिवार्य है:
रविवार को इस बागी गुट के दो सांसदों ने आधिकारिक रूप से शिंदे गुट (शिवसेना) में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। इस पर फडणवीस ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के विधिक फैसले के अनुसार एकनाथ शिंदे ही असली शिवसेना चला रहे हैं और बालासाहेब ठाकरे का ‘धनुष-बाण’ सिंबल उन्हीं के पास है।
‘लाडकी बहिन योजना’ से क्यों हटाए गए नाम? फडणवीस ने दी विधिक सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की महत्वाकांक्षी ‘लाडकी बहिन योजना’ के लाभार्थियों की सूची से कुछ नाम हटाए जाने को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर स्थिति पूरी तरह साफ की:
| छंटनी का मुख्य कारण | विधिक व तकनीकी जांच का विवरण |
| प्रारंभिक चरण | योजना को तेजी से लागू करने के लिए शुरुआत में आवेदन सेल्फ-सर्टिफिकेशन (स्व-घोषणा) के आधार पर स्वीकार किए गए थे। |
| डेटा स्क्रूटनी (जांच) | बाद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इन आवेदनों का मिलान इनकम टैक्स (Income Tax) और आरटीओ (RTO) के आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस से किया गया। |
| अपात्रता के मुख्य मामले | जांच में कई ऐसे लाभार्थी पाए गए जो नियमित रूप से इनकम टैक्स भरते हैं या जिनके पास चार पहिया (फोर-व्हीलर) गाड़ियां मौजूद हैं। |
| नियमों का उल्लंघन | कई मामलों में एक ही परिवार की 6 से 7 महिलाएं लाभ उठा रही थीं, जबकि विधिक नियम के तहत प्रति परिवार अधिकतम 02 महिलाओं को ही लाभ दिया जा सकता है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र महिला का नाम नहीं कटा है, केवल अपात्रों को हटाया गया है। |
किसान कर्ज माफी योजना पर सरकार का पक्ष
अंत में उप-मुख्यमंत्री ने सरकार की किसान कर्ज माफी योजना के विधिक नियमों और शर्तों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि कर्ज माफी का प्राथमिक आर्थिक उद्देश्य संकटग्रस्त किसानों के सिबिल स्कोर को सुधारकर उन्हें दोबारा बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और नया लोन दिलाना है।
हालांकि, सरकार को यह विधिक संतुलन भी बनाना होता है कि जो ईमानदार किसान नियमित रूप से अपना कर्ज चुकाते हैं, वे खुद को ठगा हुआ महसूस न करें। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार की शर्तें पूर्ववर्ती यूपीए (UPA) सरकार के दौर की योजनाओं से कहीं अधिक आसान, पारदर्शी और बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने वाली हैं।

