कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘दीदी’ के राजनीतिक गढ़ में मचे ऐतिहासिक घमासान के बीच एक और नया और बेहद पेचीदा मोड़ सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी ने दिल्ली में लोकसभा के 20 बागी सांसदों द्वारा ‘राष्ट्रवादी सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में किए गए सामूहिक विलय पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने एक बड़ा दावा किया कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर जो कुछ भी हुआ, उससे पश्चिम बंगाल के स्थानीय विधायक दल का कोई लेना-देना नहीं है और न ही राज्य इकाई को इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की पहले से कोई भनक थी।
टीवी देखकर पता चला सांसदों का विलय; विधायक दल पूरी तरह बेखबर
ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “हमें भी बाकी जनता की तरह टेलीविजन और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ही यह बड़ी खबर पता चली कि लोकसभा के 20 सांसदों ने एनसीपीआई (NCPI) में अपना तकनीकी विलय कर लिया है। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि यह पूरी तरह से उन माननीय सांसदों का अपना सामूहिक और स्वतंत्र फैसला है। इस विषय पर पश्चिम बंगाल के स्थानीय नेताओं या हमारे विधायक दल के बीच पहले कोई चर्चा या विचार-विमर्श बिल्कुल नहीं हुआ था।”
हमारे पास 65 विधायकों का अकाट्य संख्या बल: ऋतब्रत बनर्जी
दिल्ली के घटनाक्रम से खुद को पूरी तरह अलग करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने बंगाल विधानसभा के भीतर अपने गुट की जमीनी ताकत का मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने आंकड़ों का आधिकारिक खुलासा करते हुए कहा, “सांसदों के इस अचानक उठाए गए कदम से राज्य में हमारे संगठन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वर्तमान में हमारे गुट के साथ कुल 65 विधायकों ($65$ MLAs) का अकाट्य और मजबूत संख्या बल मौजूद है। इस भारी संख्या के साथ हमारा सामूहिक नेतृत्व पूरी तरह से एकजुट है और हम दीदी (ममता बनर्जी) के कैंप को लोकतांत्रिक चुनौती देने के लिए तैयार हैं।”
बागी नेताओं के नाम सार्वजनिक हुए तो लाएंगे ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’
इस भयंकर सियासी रस्साकशी के बीच नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी खेमे और विधानसभा सचिवालय को एक बेहद कड़ी कानूनी व विधायी चेतावनी भी जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि उनके गुट ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को एक अत्यंत गोपनीय और औपचारिक पत्र सौंपा है।
इस पत्र में उन्होंने अपने खेमे के बागी विधायकों के नामों की गोपनीयता को लेकर गंभीर विधिक चिंता जताई है। बनर्जी ने बेहद कड़े रुख में कहा, “अगर विधानसभा सचिवालय या किसी अन्य माध्यम से समय से पहले हमारे इन बागी विधायकों के नामों को जानबूझकर सार्वजनिक या लीक किया जाता है, तो हम इसे सीधे तौर पर विशेषाधिकार का हनन (Breach of Privilege) मानेंगे और सदन में इसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे।” इस रणनीतिक कदम से साफ है कि ऋतब्रत बनर्जी अपने कुनबे को लेकर बेहद सतर्क हैं और किसी भी तरह की जानकारी को विपक्ष (ममता कैंप) के हाथ नहीं लगने देना चाहते।
कल होने वाली BA कमेटी की बैठक पर टिकीं सबकी निगाहें
बंगाल की इस अभूतपूर्व राजनीतिक उठापटक के बीच अब सबकी निगाहें कल होने वाली बिजनेस एडवाइजरी (BA) कमेटी की पहली हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिक गई हैं। इस बैठक को राज्य की आगामी विधायी और राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस आगामी बैठक को लेकर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “जब कल टेबल पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक शुरू होगी, तब हम वहां की वास्तविक स्थिति को लाइव देखेंगे। मुझे अभी आधिकारिक रूप से यह पूरी जानकारी नहीं दी गई है कि इस बैठक में मुख्य धारा से और कौन-कौन से नेता शिरकत करने जा रहे हैं।” हालांकि, उन्होंने अपनी उपस्थिति पर मुहर लगाते हुए साफ कहा, “इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मैं खुद विधानसभा जाऊंगा और मेरे साथ हमारे गुट के आधिकारिक चीफ व्हिप (मुख्य सचेतक) भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।”

