प्रतिद्वंद्वी गुट को बार-बार अतिरिक्त समय दिए जाने पर जताई आपत्ति; 2027 तक वैध बताया वर्तमान संगठनात्मक ढांचा
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (AITC) में असली पार्टी के सिंबल और मान्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक नया पत्र लिखा है। पत्र के जरिए ममता बनर्जी ने आयोग से इस मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके गुट ने तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल कर दिया था, जबकि प्रतिद्वंद्वी पक्ष को दो बार समय बढ़ाने के बावजूद वे अपना पक्ष रखने में विफल रहे हैं।
ममता बनर्जी ने आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की देरी का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर प्रतिकूल और गंभीर असर पड़ेगा।
ममता बनर्जी का पत्र: ‘बार-बार समय विस्तार देना अनुचित’
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में चुनाव आयोग के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख बातें रखी हैं:
- समय सीमा का पालन: निर्वाचन आयोग ने ममता गुट को 6 जुलाई 2026 तक जवाब देने का समय दिया था, जिसका पालन करते हुए उन्होंने समय पर अपनी दलीलें जमा कर दी थीं।
- समय विस्तार पर सवाल: आयोग द्वारा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक अतिरिक्त समय दिया गया। ममता बनर्जी का तर्क है कि जब दो बार समय बढ़ाने के बाद भी प्रतिद्वंद्वी गुट जवाब दाखिल नहीं कर पाया, तो इससे स्पष्ट है कि उनके पास ममता गुट द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का कोई काट नहीं है।
- गलत साक्ष्य तैयार करने का आरोप: उन्होंने आशंका जताई कि अतिरिक्त समय का उपयोग प्रतिद्वंद्वी गुट अपने पक्ष को मजबूत दिखाने के लिए कथित रूप से नए और फर्जी दस्तावेज या साक्ष्य तैयार करने में कर सकता है।
विवाद का घटनाक्रम: क्या है पूरा मामला?
- 2 जुलाई 2026: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने चुनाव आयोग का रुख किया और खुद को तृणमूल कांग्रेस का “वास्तविक” संगठन घोषित करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि 22 जून को हुई एक विशेष बैठक में पार्टी के संगठनात्मक बदलाव किए गए थे।
- आयोग की कार्रवाई: चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को ही दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक अपना-अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
- ममता गुट का तर्क: ममता बनर्जी के गुट ने आयोग को दिए जवाब में प्रतिद्वंद्वी गुट के सभी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एआईटीसी (AITC) के संविधान के अनुसार पार्टी की सभी संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक पूरी तरह वैध हैं, क्योंकि अंतिम संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में संपन्न हुए थे।
ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि 25 जुलाई के बाद अब ऋतब्रत बनर्जी गुट को और समय न दिया जाए और दोनों पक्षों के लिए निष्पक्षता बनाए रखते हुए जल्द से जल्द अंतिम निर्णय सुनाया जाए।

