नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुरुवार को गुजरात के लिए एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है। अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन परियोजना न केवल गुजरात बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- लागत: करीब 20,667 करोड़ रुपये।
- दूरी: इस परियोजना से रेलवे नेटवर्क में लगभग 134 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
- स्वदेशी तकनीक: यह रेलवे की पहली सेमी हाई-स्पीड परियोजना होगी जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया जाएगा।
- एलिवेटेड कॉरिडोर: पूरा रेल ट्रैक जमीन से ऊपर (एलिवेटेड) और ग्रेड-सेपरेटेड होगा, जिससे कहीं भी सड़क या रेलवे फाटक की बाधा नहीं आएगी।
220 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस कॉरिडोर के लिए विशेष रूप से 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली अत्याधुनिक ट्रेनें विकसित की जाएंगी।
- वर्तमान में ‘वंदे भारत’ की गति 180 किमी/घंटा और ‘नमो ट्रेन’ की 160-180 किमी/घंटा है।
- नई ट्रेनें पूरी तरह से सुरक्षित और बाधारहित ट्रैक पर अपनी अधिकतम क्षमता से दौड़ सकेंगी।
कनेक्टिविटी और विकास के नए द्वार
यह रेल गलियारा कई महत्वपूर्ण केंद्रों को आपस में जोड़ेगा:
- धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR)
- आगामी धोलेरा एयरपोर्ट
- लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर
क्षेत्रीय लाभ और भविष्य का मॉडल
- गाँवों को लाभ: अहमदाबाद जिले के लगभग 284 गाँवों की 5 लाख आबादी को इस तेज रेल कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा।
- समय की बचत: अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी।
- देश के लिए मॉडल: अश्विनी वैष्णव के अनुसार, यह परियोजना भविष्य में पूरे देश में सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए एक ब्लूप्रिंट (मॉडल) के रूप में कार्य करेगी।

